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अल्मोड़ा के सल्ट में बाघ का आतंक: बच्चों की सुरक्षा के लिए तीन स्कूल अनिश्चितकाल तक बंद, ग्रामीणों में दहशत
अल्मोड़ा के सल्ट में बाघ का आतंक: बच्चों की सुरक्षा के लिए तीन स्कूल अनिश्चितकाल तक बंद, ग्रामीणों में दहशत
अल्मोड़ा जिले के सल्ट विकासखंड की तड़म ग्रामसभा के बौरडा तोक में बाघ के हमले में महिपाल सिंह मेहरा की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। लगातार बढ़ रहे वन्यजीव हमलों के बीच बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए ग्रामसभा के तीन स्कूलों को अग्रिम आदेश तक बंद कर दिया गया है।
वन विभाग की तीन टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रही हैं। विभाग ट्रैप कैमरों और ड्रोन के माध्यम से वन्यजीव की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है, लेकिन घटना के दो दिन बाद भी विभाग को कोई सफलता नहीं मिली है। बुधवार को ट्रैप कैमरे की फुटेज में भी किसी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई नहीं दी।
ग्रामीणों का कहना हैकि क्षेत्र में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण बच्चों और शिक्षकों को रोज करीब साढ़े चार किलोमीटर जंगल के रास्ते पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। ऐसे में बाघ की दहशत के बीच बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा हो गया है। इसी कारण शिक्षकों और अभिभावकों ने मिलकर राजकीय प्राथमिक विद्यालय बौरडा, राजकीय प्राथमिक विद्यालय घजीरा और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय घजीरा को अग्रिम आदेश तक बंद करने का फैसला लिया।
घटना के बाद ग्रामसभा के वे बच्चे भी स्कूल जाना बंद कर चुके हैं जिन्हें पैदल भौनखाल इंटर कॉलेज जाना पड़ता था। इससे करीब 45 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी सल्ट दिनेश चंद्र फूलोरिया ने बताया कि तड़म ग्रामसभा के बौर में बाघ के हमले में महिपाल सिंह मेहरा की मौत के बाद ग्रामसभा के तीन विद्यालयों को अग्रिम आदेश तक बंद कर दिया गया है। इसके लिए सभी प्रधानाध्यापकों ने लिखित पत्र कार्यालय में जमा कराए हैं।
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय घजीरा के प्रधानाध्यापक दीनबंधु उपाध्याय ने कहा कि घटना के बाद से बच्चे ही नहीं बल्कि शिक्षक भी दहशत में हैं। अभिभावकों की सहमति से बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूल बंद करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक वन विभाग सुरक्षा का भरोसा नहीं देता और खतरा कम नहीं होता, तब तक स्कूल नहीं खोले जाएंगे।
रा.उ.प्रा.वि. घजीरा की एसएमसी अध्यक्ष हीरा देवी ने कहा कि “पढ़ाई से ज्यादा जरूरी जिंदा रहना है। जिंदा रहेंगे तो पढ़ाई भी होगी। जब तक बाघ की दहशत खत्म नहीं होगी, तब तक बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे। एक महीने में क्षेत्र में दो घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं निकला है।”
ग्रामीण मोहिनी देवी ने कहा कि “जब तक वन विभाग बच्चों और शिक्षकों दोनों की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता, तब तक स्कूल नहीं खुलने चाहिए। अब तो दिन में भी घर से बाहर निकलने में डर लगने लगा है।”
लगातार हो रही घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है और ग्रामीण वन विभाग से जल्द प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
