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उत्तराखंड के लाल जनरल अनिल चौहान ने सैन्य सेवा को कहा अलविदा, बोले- मेरा कार्यकाल बेहद संतोषजनक रहा

 

उत्तराखंड के लाल जनरल अनिल चौहान ने सैन्य सेवा को कहा अलविदा, बोले- मेरा कार्यकाल बेहद संतोषजनक रहा

नई दिल्ली। देश के निवर्तमान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को भारतीय सशस्त्र बलों में अपने लंबे और गौरवपूर्ण सैन्य करियर को अलविदा कहा। उत्तराखंड के निवासी और देवभूमि के गौरव माने जाने वाले जनरल चौहान ने इस अवसर पर नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त किया।

 

 

विदाई समारोह के दौरान जनरल चौहान ने कहा कि सीडीएस के रूप में उनका कार्यकाल बेहद संतोषजनक रहा। उन्होंने कहा कि देश की सेवा करना उनके लिए सम्मान और गर्व की बात रही है। अपने कार्यकाल में उन्हें भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में काम करने का अवसर मिला।

 

 

उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए लगातार अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं। संयुक्त सैन्य ढांचे और थिएटर कमांड जैसी पहलों को उन्होंने देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया।

 

 

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए जनरल चौहान ने शहीद सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों का त्याग हमेशा राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा।

 

 

चार दशक से अधिक लंबे सैन्य करियर के दौरान जनरल अनिल चौहान ने विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। सीडीएस के रूप में उन्होंने रक्षा सुधारों, सैन्य एकीकरण और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में सशस्त्र बलों के बीच संयुक्तता को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

 

उत्तराखंड के लाल जनरल अनिल चौहान ने सैन्य सेवा को कहा अलविदा, बोले- मेरा कार्यकाल बेहद संतोषजनक रहा उत्तराखंड के लाल जनरल अनिल चौहान ने सैन्य सेवा को कहा अलविदा, बोले- मेरा कार्यकाल बेहद संतोषजनक रहा उत्तराखंड के लाल जनरल अनिल चौहान ने सैन्य सेवा को कहा अलविदा, बोले- मेरा कार्यकाल बेहद संतोषजनक रहा

उनकी विदाई के साथ भारतीय सशस्त्र बलों के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन हुआ है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके कार्यकाल में शुरू किए गए सुधार और नीतिगत पहलें आने वाले वर्षों में भी देश की रक्षा व्यवस्था को नई दिशा देती रहेंगी।

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