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क्‍या राष्ट्रपति चुनाव में हुई थी क्रास वोटिंग? आज मतपेटी से यह राज भी होगा उजागर

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President of India Election: भारत के राष्ट्रपति के चुनाव (President Election 2022) के लिए हुई वोटिंग की मतगणना गुरुवार को हो रही है। बिहार की बात करें तो सत्‍ताधारी राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ विपक्षी महागठबंधन (Mahagathbandhan), दोनों की ओर से अपने-अपने पक्ष में क्रास वोटिंग (Cross Voting) के दावा किए गए थे। मतगणना के बाद अगले निर्वाचित राष्‍ट्रपति के नाम के साथ-साथ क्रास वोटिंग के दावे की हकीकत भी सामने आ जाएगी।

मतदान के बाद से ही क्रास वोटिंग की चर्चा

राष्‍ट्रपति चुनाव के मतदान के बाद से ही क्रास वोटिंग की बातें सामने आ रहीं हैं। बिहार ही नहीं, ओडिशा, उत्‍तर प्रदेश, असम आदि कई राज्यों से ऐसी खबरें आई हैं। बिहार में राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) ने 17 विधायकों की क्रास वोटिंग का दावा किया था। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी विपक्षी दलों के वोट में सेंध लगाने की बात कही। अब मतगणना के साथ यह सच्चाई भी सामने आ जाएगी।

क्‍या दूसरे राज्‍यों में भी हुई क्रास वोटिंग? 

बिहार के अलावा दूसरे राज्‍यों में भी क्रास वोटिंग की चर्चा है। ओडिशा के कांग्रेस विधायक मोहम्मद मोकीम ने अंतरात्‍मा की आवाज पर एनडीए की द्रौपदी मुर्मू को वोट देने की बात कही। असम में एआइयूडीएफ विधायक करीम उद्दीन बरभुइया ने दावा किया कि कांग्रेस के 20 विधायकों ने क्रास वोटिंग की। हालांकि, कांग्रेस ने उनके दावे का खंडन किया। उत्‍तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP) से बरेली के भोजीपुरा के विधायक शहजील इस्लाम के भी क्रास वोटिंग की चर्चा रही है। गुजरात में भी कांग्रेस के ती से चार आदिवासी विधायकों ने एनडीए प्रत्‍याशी द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में वोट डाला। गुजरात में राष्ट्रवादी कांग्रेस विधायक कंधाल एस. जडेजा ने भी कहा कि उन्‍होंने क्रास वोटिंग की है। उधर, शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली (Manpreet Singh Ayali) ने पार्टी विरोधी रूख अख्तियार करते हुए वोट नहीं डाला।

आखिर क्‍या होती है क्रास वोटिंग, जानें

सवाल यह है कि आखिर क्रास वोटिंग होती क्‍या है? राष्‍ट्रपति चुनाव के संदर्भ में सरल भाषा में समझें तो इसका अर्थ विधायक या सांसद का अपनी पार्टी के फैसले के खिलाफ जाकर दूसरे प्रत्‍याशी के पक्ष में वोट डालना है। क्रास वोटिंग के मत वैध होते हैं। क्रास वोटिंग रोकने के लिए राजनीतिक दल अपने सदस्‍यों के लिए किसी खास प्रत्‍याशी के पक्ष में मतदान के लिए व्हिप जारी करते हैं। जो सदस्य इसके खिलाफ जाता है, उसकी पार्टी की सदस्यता खत्म हो सकती है। हालांकि, पार्टी से निकाले जाने के बावजूद उसकी विधायकी या सांसदी बची रहती है।

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