उत्तराखण्ड
लोहाघाट: ‘थाने से बोल रहा हूं… बताइए क्या काम है’, इतना सुनते ही अस्पताल पहुंचे विधायक, फिर जो हुआ उससे मच गई हलचल
लोहाघाट: ‘थाने से बोल रहा हूं… बताइए क्या काम है’, इतना सुनते ही अस्पताल पहुंचे विधायक, फिर जो हुआ उससे मच गई हलचल
मरीज का हाल जानने के लिए किए गए फोन पर मेल नर्स ने दिया चौंकाने वाला जवाब, अस्पताल पहुंचकर विधायक ने लगाई कड़ी फटकार, चिकित्सा अधीक्षक की मौजूदगी में मांगी माफी।
लोहाघाट। चंपावत जिले के लोहाघाट उप जिला अस्पताल में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब मरीज का हालचाल जानने के लिए विधायक खुशाल सिंह अधिकारी द्वारा किए गए फोन का जवाब ड्यूटी पर तैनात एक मेल नर्स ने बेहद असामान्य अंदाज में दिया। फोन पर नर्स के मुंह से निकले शब्द—”थाने से बोल रहा हूं, बताइए क्या काम है?”—सुनते ही विधायक नाराज हो गए और बिना देर किए सीधे अस्पताल पहुंच गए। वहां उन्होंने पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद संबंधित नर्स को कड़ी फटकार लगाई। बाद में नर्स ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर विधायक खुशाल सिंह अधिकारी के पास उप जिला अस्पताल में भर्ती एक मरीज के तीमारदार का फोन आया। तीमारदार ने मरीज के इलाज और अस्पताल में मिल रही सुविधाओं को लेकर चिंता जताई तथा विधायक से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विधायक ने तत्काल अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ से फोन पर मरीज की स्थिति जाननी चाही।
फोन उठाने वाले मेल नर्स ने अपना परिचय अस्पताल कर्मचारी के रूप में देने के बजाय कहा, “थाने से बोल रहा हूं, बताइए क्या काम है?” यह सुनते ही विधायक हैरान रह गए। उन्हें लगा कि या तो उनके साथ मजाक किया जा रहा है या फिर सरकारी अस्पताल में जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारी अपने कर्तव्यों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने तुरंत फोन काटा और सीधे अस्पताल पहुंच गए।
विधायक के अस्पताल पहुंचने की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन और स्टाफ में हलचल मच गई। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विराज राठी भी मौके पर पहुंचे। विधायक ने संबंधित नर्स को बुलाकर पूछा कि मरीज का हाल पूछने पर उसने इस तरह का जवाब क्यों दिया। साथ ही मरीज की स्थिति और उपचार की पूरी जानकारी भी ली। इस दौरान अस्पताल का अन्य स्टाफ और मरीज के परिजन भी मौजूद रहे।
पूछताछ में सामने आया कि संबंधित मेल नर्स प्रशिक्षण (ओरिएंटेशन/अनुभव अवधि) के दौरान सेवाएं दे रहा है। विधायक ने उसके व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अस्पताल में आने वाला हर व्यक्ति पहले से ही मानसिक तनाव में होता है। ऐसे समय कर्मचारियों का व्यवहार शालीन, जिम्मेदार और संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक कर्मचारी की लापरवाही पूरे अस्पताल की कार्यप्रणाली और सरकार की छवि पर सवाल खड़े कर सकती है।
विधायक ने चिकित्सा अधीक्षक को अस्पताल में अनुशासन और कार्यसंस्कृति को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों और उनके परिजनों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा भविष्य में ऐसी शिकायत दोबारा नहीं मिलनी चाहिए।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विराज राठी ने भी संबंधित नर्स को कड़ी फटकार लगाई। अपनी गलती स्वीकार करते हुए नर्स ने विधायक, चिकित्सा अधीक्षक और अस्पताल प्रशासन से माफी मांगी। इसके बाद मामला शांत हो गया।
घटना पूरे दिन अस्पताल और क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही। विधायक ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज के साथ-साथ मरीजों और उनके परिजनों के प्रति संवेदनशील व्यवहार भी उतना ही आवश्यक है। किसी भी कर्मचारी की अनुशासनहीनता या गैर-जिम्मेदाराना रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
