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राहुल गांधी के दौरे से पहले उत्तराखंड में सियासी घमासान: परेड ग्राउंड पर बवाल, कांग्रेस-प्रशासन आमने-सामने

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राहुल गांधी के दौरे से पहले उत्तराखंड में सियासी घमासान: परेड ग्राउंड पर बवाल, कांग्रेस-प्रशासन आमने-सामने

देहरादून। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के 17 जुलाई को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले उत्तराखंड की राजनीति में जबरदस्त घमासान छिड़ गया है। कार्यक्रम स्थल को लेकर कांग्रेस और प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। देर रात कार्यक्रम का सामान लेकर पहुंचे ट्रकों को परेड ग्राउंड में प्रवेश से रोक दिए जाने पर बड़ी संख्या में कांग्रेसी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका तो कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे माहौल देर रात तक तनावपूर्ण बना रहा।

 

 

कांग्रेस का कहना है कि उसने 10 जुलाई को नगर निगम के निर्देशानुसार 15 से 17 जुलाई तक परेड ग्राउंड आरक्षित कराने के लिए 1.77 लाख रुपये का निर्धारित शुल्क जमा कर दिया था। नगर निगम ने सशर्त अनुमति भी जारी कर दी थी। इसके बावजूद कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले मैदान में प्रवेश रोकना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा सरकार के दबाव में प्रशासन कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है।

 

 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जब मैदान नियमानुसार आरक्षित किया जा चुका है तो अब अनुमति में आनाकानी करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय के भीतर मैदान उपलब्ध नहीं कराया गया तो कांग्रेस इसका जोरदार विरोध करेगी और इसे सरकार की तानाशाही करार देगी।

 

 

दूसरी ओर नगर निगम और प्रशासन का कहना है कि परेड ग्राउंड में केंद्र सरकार का लोक संवर्धन कार्यक्रम पहले से चल रहा है, जिसे हरेला पर्व के अवसर पर 15 जुलाई के बजाय 17 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा कांग्रेस को कानून-व्यवस्था (लॉ एंड ऑर्डर) संबंधी अंतिम प्रशासनिक अनुमति भी मंगलवार रात तक प्राप्त नहीं हुई थी। इसी कारण कार्यक्रम का सामान लेकर पहुंचे ट्रकों को मैदान में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

 

 

राहुल गांधी का यह दौरा विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों और युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में कार्यक्रम स्थल को लेकर पैदा हुआ विवाद अब पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की कोशिश बता रही है, जबकि प्रशासन नियमों और अनुमति प्रक्रिया का हवाला दे रहा है।

 

कुल मिलाकर, राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे से पहले ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। परेड ग्राउंड को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है। अब सभी की नजर इस पर है कि प्रशासन अंतिम फैसला क्या लेता है और 17 जुलाई को राहुल गांधी का प्रस्तावित कार्यक्रम तय स्थान पर हो पाता है या नहीं।

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