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ममता को दूसरे करियर ऑप्शन छोड़कर टैक्सी चालक क्यों बनना पड़ा। इसके पीछे भी एक कहानी है। आइए जानते हैं।

अल्मोड़ा

उत्तराखंड: पति बीमार पड़े तो टैक्सी चालक बनी ममता, अपने दम पर चला रही है पूरे घर का खर्च

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अल्मोड़ा: महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन ये भी सच है कि अब भी ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहद कम दिखता है। सार्वजनिक परिवहन ऐसा ही क्षेत्र है। यही वजह है कि जब कोई महिला हिम्मत कर के ड्राइवर या कंडक्टर बनने का फैसला लेती है, तो हर ओर उसके जज्बे की तारीफ होती है, लोग उनकी मिसाल देते हैं।

बागेश्वर के जैनकरास की ममता जोशी ऐसी ही शख्सियत हैं, जिन्होंने कुमाऊं की दूसरी टैक्सी चालक बनकर महिलाओं के लिए एक मिसाल पेश की है। ममता ने इसी महीने परिवहन के क्षेत्र में कदम रखा है।वह जैनकरास-बागेश्वर, बागेश्वर-काफलीगैर, बागेश्वर-अल्मोड़ा रूट पर टैक्सी चला रही हैं। ममता ओम शांति टूर एंड ट्रैवल्स नाम से टैक्सी का संचालन करती हैं। ममता को दूसरे करियर ऑप्शन छोड़कर टैक्सी चालक क्यों बनना पड़ा। इसके पीछे भी एक कहानी है। 29 साल की ममता के पति सुरेश चंद्र जोशी ने लॉकडाउन के दौरान जॉब छोड़ दी थी।

साल 2021 में उन्होंने बैंक से लोन लेकर टैक्सी खरीदी, सोचा था टैक्सी चलाएंगे, लेकिन सुरेश चंद्र अचानक बीमार पड़ गए। 4 महीने तक टैक्सी खड़ी रही, परिवार बैंक की किस्त भी नहीं दे पा रहा था। साल 2022 में ममता ने पति से कहा कि वो टैक्सी चलाना चाहती हैं। इसी के साथ ममता ने वाहन चलाने का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। 8 मई को उनका लाइसेंस भी बन गया और अब वो बिना किसी परेशानी के अपना काम कर रही हैं। ममता इंटर तक पढ़ी हैं। उनकी तीन साल की बेटी हरिप्रिया है। वो बेटी और सास-ससुर की देखभाल के लिए भी समय निकालती हैं।

वो बताती हैं कि एक दिन में जैनकरास से बागेश्वर तक के तीन फेरे हो जाते हैं। वह किसी भी रूट पर गाड़ी चलाने के लिए तैयार हैं। बता दें कि कुछ महीने पहले रानीखेत की रेखा पांडे टैक्सी चलाने को लेकर चर्चा में आईं थीं। रेखा ने उत्तराखंड की पहली महिला टैक्सी चालक का खिताब अपने नाम किया। अब ममता जोशी भी उनकी राह पर चल पड़ी हैं। उनके हौसले को लोगों की खूब तारीफ मिल रही है।

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संपादक - कस्तूरी न्यूज़

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