उत्तराखण्ड
देहरादून में पीएम मोदी बोले—देवभूमि प्रगति, प्रकृति और संस्कृति की त्रिवेणी, एक्सप्रेस-वे से पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार
देहरादून में पीएम मोदी बोले—देवभूमि प्रगति, प्रकृति और संस्कृति की त्रिवेणी, एक्सप्रेस-वे से पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार
देहरादून में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड को “प्रगति, प्रकृति और संस्कृति की त्रिवेणी” बताते हुए राज्य के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के बाद राज्य में पर्यटन गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा, जिससे हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में सड़कों का जाल ही देश की भाग्य रेखाएं होती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले पूरे देश में सड़कों की इंफ्रास्ट्रक्चर में मुश्किल दो लाख करोड़ रूपया खर्च होता था। आज यह रकम करीब करीब दोगुनी होकर 12 लाख करोड़ रूपया सालाना पहुंच गई है। उनका कहना था कि 2014 में पूरे देश के लिए 2 लाख करोड़ रूपया और इस वक्त केवल उत्तराखंड के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में सड़कों के लिए सवा दो लाख करोड रुपए के प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि देहरादून में 12 किलोमीटर लंबे रोड शो के दौरान जिस तरह जनता ने उनका स्वागत किया, उससे वे बेहद भावुक और ऊर्जा से भर गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता का स्नेह और आशीर्वाद उन्हें नई प्रेरणा देता है और वे यहां से अपार ऊर्जा लेकर जा रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को उनका अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि इस विषय पर संसद में 17 और 18 तारीख को विशेष सत्र बुलाया गया है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि वर्ष 2019 के बाद से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण हर हाल में लागू किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एलिवेटेड रोड और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकसित होने से देवभूमि में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। देश-विदेश से लोग उत्तराखंड की ओर आकर्षित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए देवभूमि को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले सभी पर्यटक यह सुनिश्चित करें कि पॉलीथिन, प्लास्टिक बोतलों और अन्य प्रदूषणकारी तत्वों से इस पवित्र भूमि को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने जनभागीदारी को ही स्वच्छ और सुंदर उत्तराखंड की कुंजी बताया।
देहरादून में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा में कर स्थानीय संस्कृति को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि दून की धरती पर मां डाट काली का विशेष आशीर्वाद है और उत्तराखंड से वह नई ऊर्जा व प्रेरणा लेकर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने बाबा केदार के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी समय उनके मन से निकला था कि आने वाला दशक उत्तराखंड का दशक होगा और आज प्रदेश युवाओं की ऊर्जा के दम पर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है, जिससे रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने बी . आर . अम्बेडकर को नमन करते हुए कहा कि देश का संविधान गरीबों, वंचितों और शोषितों को न्याय दिलाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब औद्योगीकरण के पक्षधर थे और आज का भारत उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। अपने संबोधन में उन्होंने विकास को नई परिभाषा देते हुए कहा कि जैसे हस्तरेखा विशेषज्ञ हाथ की रेखाओं से भविष्य बताते हैं, उसी तरह किसी राष्ट्र का भाग्य उसकी सड़कें और रेल नेटवर्क तय करते हैं। ये आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर ही देश के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है।
प्रधानमंत्री ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को उत्तराखंड के पर्यटन के लिए गेमचेंजर बताते हुए कहा कि इससे देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी और चारधाम यात्रा को विशेष लाभ मिलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड को बारहमासी पर्यटन की दिशा में आगे बढ़ना होगा, जहां केवल ग्रीष्मकाल ही नहीं बल्कि शीतकालीन पर्यटन भी नए अवसर लेकर आएगा। उन्होंने बताया कि विकास कार्यों में प्रकृति का विशेष ध्यान रखा जा रहा है और इसी कारण एक्सप्रेसवे में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बनाए गए हैं, ताकि वन्यजीवों को कोई असुविधा न हो।
प्रधानमंत्री ने तीर्थस्थलों की स्वच्छता पर विशेष जोर देते हुए लोगों और पर्यटकों से अपील की कि देवभूमि को प्रदूषण मुक्त रखें और कूड़ा न फैलाएं। उन्होंने आगामी कुम्भ मेला को दिव्य और भव्य बनाने का आह्वान किया। साथ ही नंदा देवी राज जात का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेश की आस्था और परंपरा का प्रतीक बताया और मां नंदा को प्रणाम किया।
महिला सशक्तिकरण के विषय पर प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि चार दशक के इंतजार के बाद संसद ने इस बिल को पारित किया है और अब इसे लागू करने में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से इसे लागू करने का लक्ष्य है और इसके लिए विशेष सत्र बुलाने के साथ ही देश की महिलाओं के नाम एक खुला पत्र भी लिखा गया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है और डबल इंजन सरकार उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने सेना के शौर्य को नमन करते हुए कहा कि देवभूमि का सैन्य परंपरा से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने गढ़ी कैंट और शहीद जसवंत सिंह रावत के अदम्य साहस को याद किया और कहा कि देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने वन रैंक वन पेंशन योजना का जिक्र करते हुए बताया कि इसके तहत बड़ी राशि खर्च की गई है और अब 70 वर्ष से अधिक आयु के पूर्व सैनिकों को दवाओं की होम डिलीवरी की सुविधा भी दी जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभक्ति, देवभक्ति और प्रगति के सभी आयामों को जोड़ते हुए भारत को आगे बढ़ाना ही हमारा लक्ष्य है।
इससे पहले प्रधानमंत्री 12,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण किया। 213 किलोमीटर लंबा यह छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर अब दिल्ली से देहरादून के बीच यात्रा को और तेज, सुरक्षित और सुगम बनाएगा। इस परियोजना के पूर्ण संचालन के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा समय करीब 6 घंटे से घटकर महज 3 घंटे रह जाएगा, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बड़ा बल मिलेगा।
यह आधुनिक मल्टी-लेन कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ते हुए आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों को नई गति देगा। परियोजना के तहत 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवरब्रिज, चार प्रमुख पुल और 12 वे-साइड सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। इसके साथ ही उन्नत ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से लैस यह कॉरिडोर सुरक्षित और व्यवस्थित यातायात सुनिश्चित करेगा।
इस परियोजना की खास बात इसका पर्यावरण के प्रति संतुलित दृष्टिकोण है। पारिस्थितिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इसमें वन्यजीव संरक्षण के विशेष प्रावधान किए गए हैं। करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, जो एशिया के सबसे लंबे कॉरिडोर में शामिल है, जंगली जानवरों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा आठ पशु मार्ग, 200 मीटर लंबे दो हाथी अंडरपास और दात काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी बनाई गई है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी।
दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से चारधाम यात्रा, ऋषिकेश, हरिद्वार और मसूरी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, जिससे उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी। इसके साथ ही बागपत, शामली और सहारनपुर जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय उद्योगों, विशेषकर सहारनपुर की लकड़ी नक्काशी और मुजफ्फरनगर के कागज उद्योग को इससे नई गति मिलने की उम्मीद है।
परियोजना से कृषि उत्पादों की तेज आवाजाही संभव होगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि के रास्ते खुलेंगे। साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा संस्थानों तक पहुंच बेहतर होने से आमजन के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा। यह कॉरिडोर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए व्यापार और विकास के नए अवसर पैदा करेगा।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि आधुनिक और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण भारत को तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ा रहा है और देश ‘गति शक्ति’ के संकल्प के साथ नए भारत के निर्माण की ओर अग्रसर है।