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उत्तराखंड में सख्ती: लंबे समय से बीमार व अनुपस्थित शिक्षकों पर गिरेगी गाज, हो सकती है अनिवार्य सेवानिवृत्ति, सम्बद्ध शिक्षकों का भी ब्यावर मांगा
उत्तराखंड में सख्ती: लंबे समय से बीमार व अनुपस्थित शिक्षकों पर गिरेगी गाज, हो सकती है अनिवार्य सेवानिवृत्ति
उत्तराखंड में शिक्षा विभाग अब लापरवाही और लंबे समय से अनुपस्थिति के मामलों पर सख्त रुख अपनाने जा रहा है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने साफ संकेत दिए हैं कि गंभीर रूप से बीमार होने के कारण लंबे समय से ड्यूटी से दूर चल रहे शिक्षकों की जांच कर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है।
मंत्री ने शिक्षा महानिदेशालय को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि ऐसे शिक्षकों और कर्मचारियों की विस्तृत सूची तत्काल तैयार की जाए। इस सूची के आधार पर चिकित्सा बोर्ड और विभागीय समिति की रिपोर्ट के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो और स्कूलों में नियमित रूप से शिक्षक उपलब्ध रहें।
बताया जा रहा है कि इससे पहले भी इस दिशा में पहल की गई थी, लेकिन तब ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। अब विभाग ने इसे प्राथमिकता में रखते हुए प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया है।
इसके साथ ही विभाग में एक और बड़ी कवायद शुरू की गई है। स्कूलों और दफ्तरों में मूल तैनाती से हटकर संबद्ध चल रहे शिक्षकों और कर्मचारियों का पूरा ब्यौरा मांगा गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि एक सप्ताह के भीतर यह सूची उपलब्ध करानी होगी।
जानकारी के अनुसार, कई शिक्षक अपने निर्धारित स्कूलों के बजाय अन्य संस्थानों या कार्यालयों में जुड़े हुए हैं, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे मामलों की भी समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
