उत्तराखण्ड
पत्ता साफ हुआ तो पता चला… उत्तराखंड में कागजों पर चल रही थीं 17 राजनीतिक पार्टियां! चुनाव आयोग की कार्रवाई के बाद सामने आया अस्तित्व
पत्ता साफ हुआ तो पता चला… उत्तराखंड में कागजों पर चल रही थीं 17 राजनीतिक पार्टियां! चुनाव आयोग की कार्रवाई के बाद सामने आया अस्तित्व
देहरादून। चुनावी तैयारियों के बीच उत्तराखंड की राजनीति में चुनाव आयोग की एक बड़ी कार्रवाई ने कई ऐसे राजनीतिक दलों की हकीकत सामने ला दी है, जिनका नाम तो चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज था, लेकिन धरातल पर उनकी सक्रियता नजर नहीं आ रही थी। आयोग द्वारा 17 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPP) को डीलिस्ट किए जाने के बाद अब इन दलों के अस्तित्व पर सवाल खड़े हो गए हैं।
चुनाव आयोग की कार्रवाई के बाद यह साफ हुआ कि प्रदेश में कई दल लंबे समय से केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित थे। इनमें से कई दलों ने वर्षों से कोई चुनाव नहीं लड़ा, कुछ अपने घोषित पते पर नहीं मिले और कई ने चुनाव आयोग को जरूरी वित्तीय व अन्य रिपोर्ट भी समय पर उपलब्ध नहीं कराई।
छह साल से चुनावी मैदान से दूर, नोटिस का भी नहीं दिया संतोषजनक जवाब
चुनाव आयोग की जांच में सामने आया कि हटाए गए कई दल पिछले करीब छह वर्षों से किसी भी चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय नहीं थे। आयोग ने पहले इन दलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने के बाद केंद्रीय चुनाव आयोग ने इन्हें सूची से बाहर करने का निर्णय लिया।
42 से घटकर 25 रह गए पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखंड में कुल 42 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल दर्ज थे। अब 17 दलों के डीलिस्ट होने के बाद इनकी संख्या घटकर 25 रह गई है। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सात नए दलों ने भी चुनाव आयोग के समक्ष पंजीकरण के लिए आवेदन किया है।
इन दलों का हुआ डीलिस्टेशन
चुनाव आयोग की कार्रवाई की सूची में शामिल प्रमुख दलों में—
भारत परिवार पार्टी – हरिद्वार
भारतीय जनक्रांति पार्टी – देहरादून
सुराज सेवा दल – हल्द्वानी
पीपुल्स पार्टी – रुड़की
उत्तराखंड जनशक्ति पार्टी – देहरादून
प्रजातंत्र पार्टी ऑफ इंडिया – रामनगर
और अन्य पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल शामिल हैं।
आयोग बोला- पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम
चुनाव आयोग का कहना है कि यह कार्रवाई चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए की गई है। आयोग समय-समय पर ऐसे दलों की समीक्षा करता है जो केवल रिकॉर्ड में मौजूद हैं, लेकिन चुनावी गतिविधियों में सक्रिय नहीं हैं।
राजनीतिक हलकों में अब चर्चा इस बात की है कि जिन दलों की मौजूदगी आम लोगों को भी जानकारी में नहीं थी, उनका नाम चुनाव आयोग की सूची से हटने के बाद ही सार्वजनिक चर्चा में आया है। आगामी चुनाव से पहले आयोग की यह कार्रवाई प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर को भी प्रभावित कर सकती है।
