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…तो राज्यपाल के न्योते के बिना बन गई शिंदे-फडणवीस सरकार? RTI के खुलासे के बाद NCP नेता महेश तपासे का सवाल

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हाइलाइट्स

  • क्या राज्यपाल के न्योते के बिना बन गई शिंदे-फडणवीस सरकार?
  • आरटीआई के खुलासे के बाद NCP प्रवक्ता महेश तपासे का सवाल
  • यह जानकारी मिली कि इस तरह के किसी पत्र का कोई रिकॉर्ड नहीं है

मुंबई: आरटीआई कार्यकर्ता संतोष जाधव ने महाराष्ट्र राजभवन से एकनाथ शिंदे (Ekanth Shinde) और देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) को सरकार बनाने का न्योता दिए जाने के पत्र की तारीख और उसके जावक नंबर की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में राज्यपाल के सचिवालय से यह जानकारी मिली कि इस तरह के किसी पत्र का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसीलिए इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा सकती। आरटीआई से हुए खुलासे के बाद एनसीपी के प्रवक्ता महेश तपासे (Mahesh Tapase) ने सवाल उठाया है कि क्या बिना राज्यपाल (Governor Bhagat Singh Koshyari) के न्योते बिना ही शिंदे-फडणवीस सरकार बन गई है? तपासे ने कहा कि जब कोई नेता उसके पक्ष में बहुमत होने का पत्र राज्यपाल को देता है, उसके बाद राज्यपाल उसे सदन में बहुमत साबित करने का लिखित पत्र देते हैं। लेकिन महाराष्ट्र (Maharashtra) के राजभवन में ऐसे किसी पत्र का कोई रिकॉर्ड न होने की बात सामने आने के बाद यह सवाल उठना लाजमी है कि राज्यपाल का न्योता न होने के बावजूद सरकार की स्थापना कैसे और किसके आदेश से हुई?

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मुख्यमंत्री की शपथ कैसे हुई? क्या इस तरह अस्तित्व में आई सरकार का कोई संवैधानिक दर्जा है। तपासे ने कहा कि इस बारे में किसी और के बजाय खुद राज्यपाल को स्थिति स्पष्ट करना चाहिए। तपासे ने कहा कि आरटीआई से यह जानकारी सामने आने के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने खुद पदमुक्त होने की इच्छा जताई है। क्या इन दोनों बातों के बीच कोई संबंध है?

हमलावर हुई महाविकास अघाड़ी
इस आरटीआई के बहाने महाविकास अघाड़ी के तीनों घटक दल के शिंदे सरकार और महाराष्ट्र के राज्यपाल पर हमला बोल रहे हैं। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर राज्यपाल को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हालांकि दूसरी तरफ राज्यपाल अब महाराष्ट्र से जाने की इच्छा जता चुके हैं। एक तरह से राजनीतिक संन्यास लेने की बात वह पीएम मोदी के सामने रख चुके हैं। महाराष्ट्र में जब से शिंदे फडणवीस सरकार आई है। तब से ही महाविकास अघाड़ी के नेता इस सरकार को असंवैधानिक और अनैतिक सरकार बता रहे हैं। उनकी इन दावों को अब इस आरटीआई के जवाब ने और भी ज्यादा ताकत दे दी है। माना जा रहा है कि महाराष्ट्र की सियासत में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर जमकर घमासान होगा। उद्धव गुट के नेता इस मुद्दे को भी अदालत और चुनाव आयोग के समक्ष उठा सकते हैं।

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