Connect with us

Uncategorized

नेताओं के पीछे नेट…पतीला इज्जत का

कस्तूरी न्जूज
चुनाव…इंटरनेट और नेताजी, इन तीन बातों का सीधा संबंध है। सही भी और गलत भी, सही किया तो सही, गलत कर दिया तो आफत और इज्जत का पलीता। पता नहीं कब क्या वायरल हो जाए…। इतना तेज वायरल तो बुखार भी नहीं होता, जितना यहां ऑडियो, वीडियो होती हैं, और हो रही हंैं। कष्टकारी बात तब है, जब कई साल पुराना नेताजी का कोई वीडियो नेट पर वायरल होता है, और स्थिति सिर धुनने जैसी होती है। जनता भूल चुकी होती है, जनता वैसे भी भूल जाती है कि क्या हुआ था, मगर उसे याद दिला ही दिया जाता है, हालांकि इस बाक का कोई फर्क नहीं पड़ता। उत्तराखंड ही नहीं जहां-जहां विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, वहां ऐसे ही धमाके वायरल हो रहे हैं। इंटरनेट जड़ें भी खोदता है, इधर विरोधी का हाथों को खुजली हुई तो वह गया सीधे नेट के जाल में। वहां से ढूंढ-ढूंढकर मसाला निकलता है। मुसीबात यह है कि नेट में एक बार कुछ चला गया तो वह फिर कभी नष्ट नहीं होता है, ठीक जनता के कष्टों की तरह। कहीं न कहीं, किसी न किसी बहाने वह चलता ही रहता है। यह किसी के काम का नहीं होता, मगर विरोधियों के लिए यह नया, पुराना कुछ भी हो, एक हथियार ही होता है। जनता के कष्ट वायरल नहीं होते हैं, होते भी हैं तो वह नेताजी की निगाहों में नहीं पड़ते, मगर नेताजी के ऑडियो आग जैसे वायरल होते हैं। इधर अभी एक ताजा ऑडियो वायरल हुआ तो फिर धमाका। इन धमाकों का जनता से कोई लेना देना नहीं होता, यह तो विरोधियों का हथियार है। किसी की आवाज से छेड़छाड़ भी की जा सकती है, होती भी है, यहां पता नहीं ऐसा हुआ है या नहीं, यह तो नेताजी ही जानें। मगर विरोधी सक्रिय हैं। इंटरनेट की मायावी दुनिया में यह नेट आखिर नेताओं की इज्जत का पलीता क्यों करता होगा? कोई फर्क नहीं पड़ता, चुनाव भी निकल जाएगा और यह वायरल ट्रेंड भी, मगर जनता के कष्ट वहीं रहेंगे, ठीक वैसे ही जैसे ये ऑडियो, वीडियो घूम रहे होंगे कईं नेट की दुनिया में।

Continue Reading

More in Uncategorized

Recent Posts

Facebook

Trending Posts