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126 से 136 और फिर 138 साल… ‘डॉक्टर बाबा’ परमानंद पुरी ने ली समाधि, पीछे छोड़ गए उम्र और जीवन के कई रहस्य
हल्द्वानी। अंग्रेजों के दौर में चिकित्सा अधिकारी रहने का दावा करने वाले और बाद में संन्यास लेकर आध्यात्मिक जीवन अपनाने वाले संत स्वामी परमानंद पुरी महाराज ने 29 सितंबर 2026 को हल्द्वानी के शीशमहल क्षेत्र में अंतिम सांस ली और आश्रम में समाधि ले ली। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद अनुयायियों और भक्तों में शोक का माहौल है। उपलब्ध हालिया रिपोर्ट के अनुसार उनकी उम्र 138 वर्ष बताई गई है।
परमानंद पुरी महाराज पिछले कई दशकों से कुमाऊं में आध्यात्मिक जीवन के लिए चर्चित रहे। उन्हें उनके अनुयायी और स्थानीय लोग ‘डॉक्टर बाबा’ के नाम से भी जानते थे। उनकी सबसे बड़ी पहचान उनकी असाधारण बताई जाने वाली उम्र रही। वर्ष 2015 में जब वे सार्वजनिक रूप से चर्चा में आए थे, तब उनकी उम्र 126 वर्ष बताई गई थी। उस समय उन्होंने अपना जन्म 10 अक्टूबर 1889 को काशी के एक संभ्रांत ब्राह्मण परिवार में होने की बात कही थी।
अंग्रेजों के जमाने में डॉक्टर होने का दावा
परमानंद पुरी महाराज ने अपने जीवन के बारे में बताते हुए कहा था कि उन्होंने अंग्रेजों के शासनकाल में चिकित्सा अधिकारी के तौर पर काम किया। बाद में उन्होंने नौकरी और सांसारिक जीवन छोड़कर संन्यास ग्रहण कर लिया। 2015 की रिपोर्ट में उन्होंने बताया था कि पदमपुरी पहुंचने के बाद उन्होंने लंबे समय तक तपस्या की और वर्षों तक फलाहार किया। उनका कहना था कि ब्रह्मचर्य, अनुशासन, संयमित जीवन और संतुलित शाकाहारी भोजन उनकी दीर्घायु का आधार रहे।
उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्हें अपने गुरु विश्वदानंद महाराज के आज भी दर्शन होते हैं। उनकी दिनचर्या भी सामान्य जीवन से काफी अलग बताई जाती थी।
2024 में मतदाता सूची ने फिर चौंकाया
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान परमानंद पुरी एक बार फिर देशभर में चर्चा में आए। निर्वाचन संबंधी रिकॉर्ड के आधार पर उनकी उम्र 135 वर्ष बताई गई और उन्हें उत्तराखंड का सबसे उम्रदराज मतदाता बताया गया। रिपोर्ट के मुताबिक मतदाता रिकॉर्ड में उनका नाम गुनियालेख क्षेत्र से दर्ज था।
उस समय उन्होंने बताया था कि वह रोजाना करीब रात दो बजे उठते, नित्यकर्म के बाद कई घंटे ध्यान करते और हिंदी-अंग्रेजी के अखबार पढ़ते थे। दोपहर में भोजन और कुछ आराम के बाद भक्तों से मिलते थे तथा रात करीब साढ़े दस बजे सोते थे। उन्होंने अपनी लंबी उम्र का श्रेय संयमित जीवन और अनुशासन को दिया था।
उम्र को लेकर भी बना रहा रहस्य
परमानंद पुरी की उम्र की कहानी भी अपने आप में बेहद दिलचस्प रही। 2015 में उनकी उम्र 126 वर्ष बताई गई थी, जबकि 2024 में मतदाता सूची में यह आंकड़ा 135 वर्ष हो गया। 2026 में उनके समाधि लेने की हालिया रिपोर्ट में उम्र 137 वर्ष बताई गई है।
हालांकि, उनकी जन्मतिथि 10 अक्टूबर 1889 वाला दावा स्वीकार किया जाए तो 2026 में उनकी उम्र करीब 137 वर्ष बैठती है। इसलिए 137 वर्ष का आंकड़ा उनके बताए जन्म-वर्ष के साथ संगत दिखाई देता है। लेकिन उनकी उम्र को विश्व रिकॉर्ड स्तर पर प्रमाणित करने के लिए जन्म संबंधी मूल दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होगी।
2015 में जब उनकी उम्र 126 वर्ष होने की बात सामने आई थी, तब उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ने पर वह अपनी उम्र का प्रमाण दे सकते हैं। तत्कालीन एसडीएम ने भी प्रमाण मिलने पर उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजने की बात कही थी।
गुफा में साधना से लेकर शीशमहल तक
परमानंद पुरी लंबे समय तक धारी क्षेत्र के पलड़ा और गुनियालेख इलाके में स्थित आश्रम और गुफा से जुड़े रहे। बाद के वर्षों में वे हल्द्वानी में अपने भक्तों के यहां रहने लगे। 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक वह नैनीताल रोड स्थित अपने भक्त राजीव विनायक के यहां भी रहे थे।
अब उनके जीवन का अंतिम अध्याय भी हल्द्वानी में ही पूरा हुआ। 29 सितंबर 2026 को उनके समाधि लेने की खबर सामने आई। उनके भक्तों के अनुसार उन्होंने करीब 137 वर्ष का जीवन देखा और अपने पीछे तपस्या, संयम, चिकित्सा सेवा, संन्यास और असाधारण दीर्घायु से जुड़ी कई ऐसी कहानियां छोड़ गए, जिन पर आने वाले समय में भी चर्चा होती रहेगी।

