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बयेला के लाल ने गिनीज बुक में दर्ज कराया नाम, विश्व रिकॉर्ड बनाकर बढ़ाया उत्तराखंड का मान
बयेला के लाल ने गिनीज बुक में दर्ज कराया नाम, विश्व रिकॉर्ड बनाकर बढ़ाया उत्तराखंड का मान
अल्मोड़ा। जिले के ग्राम बयेला के मूल निवासी और हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय, उत्तराखंड के पूर्व कुलपति डा. हेमचंद्र पांडेय ने अपनी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है। स्वास्थ्य सेवा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) विषय पर आयोजित यूट्यूब लाइव प्रसारण के जरिए विश्व रिकॉर्ड बनाने पर उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। इस उपलब्धि के लिए उन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है।
भारत सरकार के शासी निकाय नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के सदस्य तथा हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जौलीग्रांट के चिकित्सालय सेवा निदेशक डा. पांडेय ने स्वास्थ्य सेवा में एआई के महत्व और उपयोगिता पर यूट्यूब लाइव के माध्यम से जानकारी साझा की थी। इस लाइव प्रसारण को एक साथ 17,999 दर्शकों ने देखा, जिसके आधार पर यह विश्व रिकॉर्ड बनाया गया।
डा. हेमचंद्र पांडेय पूर्व में हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं। उन्हें रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियंस (FRCP), ग्लास्गो एवं एडिनबर्ग, यूके की फेलोशिप से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा वह फेलो ऑफ ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन और फेलो ऑफ एकेडमी ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन का गौरव हासिल करने वाले देश के पहले चिकित्सक बताए जाते हैं।
चिकित्सा प्रशासन के क्षेत्र में भी डा. पांडेय का उल्लेखनीय योगदान रहा है। कुछ वर्ष पूर्व संजय गांधी पीजीआई, लखनऊ के पूर्व निदेशक प्रो. एके महापात्रा ने बताया था कि एम्स नई दिल्ली से एमएचए की डिग्री हासिल करने के बाद डा. हेमचंद्र पांडेय ने एसजीपीजीआई, लखनऊ में सुपरस्पेशलिटी चिकित्सा के बेड की संख्या 25 से बढ़ाकर 1200 तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार के साथ ही मरीजों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता का उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में भी उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किया।
बयेला से लखनऊ तक का सफर
अल्मोड़ा जिले के ग्राम बयेला के मूल निवासी डा. पांडेय ने वर्ष 1970 में मिशन इंटर कॉलेज, द्वाराहाट से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद वह अपने अधिवक्ता भाई प्रमोद पांडेय के पास लखनऊ चले गए, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की। इसके बाद सीपीएमटी क्वालीफाई कर वर्ष 1982 में केजीएमसी से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की।
एमबीबीएस के बाद उन्होंने अपने चिकित्सकीय सेवाकाल के शुरुआती तीन वर्ष अंडमान-निकोबार में सेना के चिकित्सालय में सेवाएं दीं। इसके बाद दो वर्ष बरेली और शाहजहांपुर में नियुक्त रहे। आगे चलकर उन्होंने एसजीपीजीआई, लखनऊ में अस्पताल प्रशासन विभाग के विभागाध्यक्ष और चिकित्सा अधीक्षक के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।
सितंबर 2018 में हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति बनने के बाद भी डा. पांडेय की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती रहीं। कोविड महामारी के दौरान संभावित तीसरी लहर की रोकथाम और प्रबंधन के लिए डीजी स्वास्थ्य, उत्तराखंड ने उन्हें राज्यस्तरीय टास्क फोर्स का अध्यक्ष भी नामित किया था।
गांव की मिट्टी से निकलकर चिकित्सा शिक्षा, अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले डा. हेमचंद्र पांडेय की गिनीज बुक में दर्ज यह उपलब्धि अल्मोड़ा ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय है।

