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उत्तराखण्ड

जब सिस्टम ने नहीं सुनी, तो खुद सड़क पर उतरे विपिन पांडे, गड्ढे भरने का उठाया बीड़ा, ऊंचा पुल चौराहे पर सनातनी ट्रस्ट के अध्यक्ष ने खुद संभाली कमान, दोपहिया चालकों की सुरक्षा के लिए सुबह-सुबह शुरू किया अभियान

जब सिस्टम ने नहीं सुनी, तो खुद सड़क पर उतरे विपिन पांडे, गड्ढे भरने का उठाया बीड़ा, ऊंचा पुल चौराहे पर सनातनी ट्रस्ट के अध्यक्ष ने खुद संभाली कमान, दोपहिया चालकों की सुरक्षा के लिए सुबह-सुबह शुरू किया अभियान

 

हल्द्वानी। सड़क पर गड्ढे हों, उनसे रोजाना जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का गुजरना भी हो, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहे तो आम आदमी की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऊंचा पुल चौराहे पर लंबे समय से बने गड्ढों से परेशान दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए आखिरकार सनातनी ट्रस्ट के अध्यक्ष विपिन पांडे खुद सड़क पर उतर आए। जब जिम्मेदार तंत्र की ओर से गड्ढे भरने की पहल नहीं हुई तो उन्होंने खुद ही इस काम का बीड़ा उठाते हुए सुबह-सुबह गड्ढे भरने का अभियान शुरू कर दिया।

 

विपिन पांडे आज अपने साथ ऑटो में गिट्टी, बजरी और गड्ढों को भरने के लिए जरूरी सामग्री लेकर ऊंचा पुल चौराहे पहुंचे। इसके बाद उन्होंने खुद सड़क पर बने गड्ढों को भरने का काम शुरू कर दिया। उनका यह कदम सड़क से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

 

विपिन पांडे का कहना है कि इस मार्ग से विधायक, मंत्री और अधिकारी समेत तमाम जिम्मेदार लोग रोजाना गुजरते हैं, लेकिन इसके बावजूद सड़क के गड्ढों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था। इन गड्ढों के कारण सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को उठानी पड़ रही थी। अचानक गड्ढा सामने आने या उसमें पहिया पड़ने से वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं और दुर्घटना का शिकार होने का खतरा बना रहता है।

 

उन्होंने बताया कि पिछले दिनों भी इसी स्थान पर एक दोपहिया वाहन चालक गंभीर दुर्घटना का शिकार होते-होते बाल-बाल बचा था। इस घटना ने उन्हें झकझोर दिया। उनका मानना है कि सड़क के गड्ढे केवल असुविधा का कारण नहीं हैं, बल्कि किसी की जान पर भी भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते समस्या का समाधान होना चाहिए।

 

विपिन पांडे ने कहा कि जब जिम्मेदार तंत्र की ओर से गड्ढे भरने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया गया तो उन्होंने खुद आगे आने का निर्णय लिया। इसी सोच के साथ वह जरूरी सामग्री लेकर मौके पर पहुंचे और अपने हाथों से गड्ढे भरने शुरू कर दिए।

 

उनकी इस पहल ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और जनसमस्याओं के प्रति जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही का सवाल खड़ा कर दिया है। आमतौर पर सड़कों की मरम्मत का काम संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होती है, लेकिन जब छोटी-सी समस्या भी लंबे समय तक बनी रहती है तो उसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है।

 

ऊंचा पुल चौराहे पर विपिन पांडे की यह पहल भले ही एक छोटी कोशिश नजर आए, लेकिन इसका संदेश बड़ा है। सड़क पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। सवाल यह भी है कि जिस समस्या के समाधान के लिए एक सामाजिक संगठन के अध्यक्ष को खुद गिट्टी-बजरी लेकर सड़क पर उतरना पड़ा, उसे जिम्मेदार विभाग समय रहते क्यों नहीं दूर कर सके?

 

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