उत्तराखण्ड
कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन, जिन्हें बनाया गया उत्तराखंड का नया राज्यपाल?
चार बार विधायक और पूर्व सांसद रह चुके हैं डॉ. बिसेन, मध्य प्रदेश की राजनीति से रहा है लंबा जुड़ाव
देहरादून। उत्तराखंड को नया राज्यपाल मिल गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार, 12 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया है। वह वर्तमान राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह का स्थान लेंगे। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उनकी नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं। विधायक से लेकर सांसद तक का सफर तय करने वाले बिसेन को विधानसभा और संसद दोनों में काम करने का अनुभव है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब उत्तराखंड में विकास, प्रशासन और संवैधानिक विषयों को लेकर राज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
14 मई 1952 को हुआ जन्म
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया में हुआ था। उनकी शिक्षा चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी रही है। लोकसभा की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, उन्होंने रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। उनकी शैक्षिक योग्यताओं में आयुर्वेद विज्ञानाचार्य तथा आधुनिक चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा से संबंधित डिप्लोमा का उल्लेख मिलता है। चिकित्सा और कृषि क्षेत्र से जुड़ी पृष्ठभूमि के बाद उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
चार बार रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य
डॉ. बिसेन का राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश से शुरू हुआ। वह वर्ष 1990 से 2008 के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा के चार कार्यकालों में सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। विधानसभा में लंबे समय तक काम करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति की ओर रुख किया और लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई।
2019 में पहुंचे लोकसभा
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने डॉ. ढाल सिंह बिसेन को मध्य प्रदेश की बालाघाट लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद वह 17वीं लोकसभा के सदस्य बने। उनका सांसद के रूप में कार्यकाल वर्ष 2019 से 2024 तक रहा। संसद में उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधा, किसानों से जुड़े मुद्दों, पर्यटन विकास और क्षेत्रीय बुनियादी सुविधाओं जैसे विषयों को उठाया।
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, 17वीं लोकसभा के दौरान उनकी उपस्थिति 99 प्रतिशत दर्ज की गई थी। यह उनके संसदीय कार्यकाल से जुड़ा एक उल्लेखनीय तथ्य है।
मध्य प्रदेश सरकार में भी संभाली जिम्मेदारी
डॉ. बिसेन मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2012 में उन्हें चौथे राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था। इस भूमिका में स्थानीय निकायों के संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं के विकास से जुड़े विषय उनके कार्यक्षेत्र में शामिल रहे। विधानसभा, राज्य सरकार और संसद में काम करने का उनका अनुभव उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उत्तराखंड में होगी नई संवैधानिक भूमिका
मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद अब डॉ. ढाल सिंह बिसेन उत्तराखंड के संवैधानिक प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे। राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका राज्य सरकार और संवैधानिक व्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण होगी। राज्यपाल संविधान के अनुरूप कार्य करते हैं और विधेयकों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के तहत निर्णय लेने सहित विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।
डॉ. बिसेन का अब तक का राजनीतिक अनुभव मुख्य रूप से मध्य प्रदेश की विधानसभा, लोकसभा और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा रहा है। उत्तराखंड में उनकी नई भूमिका में इस अनुभव का किस प्रकार उपयोग होता है, यह उनके पदभार ग्रहण करने के बाद सामने आएगा।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी घोषणा के साथ ही उत्तराखंड के नए राज्यपाल के रूप में डॉ. ढाल सिंह बिसेन के नाम पर मुहर लग गई है। हालांकि, उनकी नियुक्ति औपचारिक रूप से उसी दिन प्रभावी होगी, जिस दिन वह राज्यपाल का पदभार ग्रहण करेंगे।