उत्तराखण्ड
खड़गे की सभा के दौरान कांग्रेस का प्रदर्शन, भाजपा को मिला बैठे-बिठाए सियासी हथियार
खड़गे की सभा के दौरान कांग्रेस का प्रदर्शन, भाजपा को मिला बैठे-बिठाए सियासी हथियार
एसएसपी कार्यालय विवाद और सनातन पर कथित टिप्पणियों ने भाजपा को आक्रामक होने का मौका दिया
हल्द्वानी। चुनावी मौसम से पहले हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की शनिवार को हुई जनसभा का मकसद जहां पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार करना था, वहीं सभा से पहले और दौरान हुए विवादों ने कांग्रेस के सामने एक अलग राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। जिस जनसभा के जरिए कांग्रेस भाजपा पर हमला बोलना चाहती थी, उसके अगले ही दिन भाजपा ने कांग्रेस को घेरने के लिए मुद्दा तैयार कर लिया।
शनिवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वाहनों को रोके जाने का आरोप लगाते हुए एसएसपी कार्यालय में पहुंचकर हंगामा किया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधिकारियों से नाराजगी जताई। बताया गया कि एसएसपी के कार्यालय में मौजूद नहीं होने पर कार्यकर्ताओं ने काफी देर तक वहां विरोध जताया। यही घटनाक्रम रविवार को भाजपा के लिए कांग्रेस पर हमला करने का प्रमुख आधार बन गया।
इसके साथ ही खड़गे की जनसभा के दौरान सनातन धर्म को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का मामला भी भाजपा ने हाथों-हाथ उठा लिया। भाजपा ने इसे देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक भावनाओं और सामाजिक मर्यादा से जोड़ते हुए कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। रविवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किए और प्रशासन को ज्ञापन सौंपे।
कांग्रेस की रणनीति पर ही भारी पड़ा विवाद
राजनीतिक तौर पर देखें तो कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शनिवार की सभा में पार्टी जिस मुद्दे और संदेश को जनता तक पहुंचाना चाहती थी, वह पीछे चला गया और चर्चा एसएसपी कार्यालय के विवाद तथा कथित सनातन विरोधी टिप्पणियों पर आ गई।
अगर एसएसपी कार्यालय में हंगामा नहीं होता और जनसभा के दौरान विवादित टिप्पणियों का मामला सामने नहीं आता, तो भाजपा के पास कांग्रेस के खिलाफ इस तरह आक्रामक होने का तत्काल कोई बड़ा स्थानीय मुद्दा शायद नहीं होता। यही वजह है कि भाजपा ने रविवार को बिना समय गंवाए दोनों घटनाओं को राजनीतिक मुद्दा बना दिया।
भाजपा के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनावी राजनीति में विपक्ष को घेरने के लिए हमेशा बड़े मुद्दों की जरूरत नहीं होती। कई बार प्रतिद्वंद्वी दल की छोटी सी राजनीतिक या संगठनात्मक चूक भी बड़ा नैरेटिव बनाने का अवसर दे देती है। हल्द्वानी में फिलहाल कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है।
भाजपा ने बदला मुद्दे का रुख
कांग्रेस जहां खड़गे की सभा को केंद्र में रखकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाना चाहती थी, वहीं भाजपा ने अगले दिन मुद्दे का रुख ही बदल दिया। अब भाजपा कांग्रेस की नीतियों के बजाय उसके व्यवहार, धार्मिक टिप्पणियों और पुलिस प्रशासन के साथ कथित टकराव को लेकर सवाल उठा रही है।
उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी परिषद के अध्यक्ष डॉ. अनिल कपूर डब्बू समेत भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सनातन, संस्कार और देवभूमि की मर्यादा के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। भाजपा नैनीताल जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट के नेतृत्व में डीएम कैंप कार्यालय में ज्ञापन भी सौंपा गया।
कांग्रेस के लिए अब नुकसान की भरपाई चुनौती
हालांकि पूरे विवाद का दूसरा पक्ष भी है। कांग्रेस का तर्क है कि पुलिस कार्यालय में कार्यकर्ताओं के पहुंचने के पीछे वाहनों को रोके जाने को लेकर नाराजगी थी और यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा था। वहीं सनातन को लेकर कथित टिप्पणियों की वास्तविक प्रकृति और संदर्भ भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग तथ्यात्मक जांच का विषय है।
लेकिन राजनीति में तथ्य सामने आने तक बनी धारणा भी काफी प्रभाव डालती है। भाजपा ने इन दोनों घटनाओं को जोड़कर कांग्रेस के खिलाफ एक ऐसा राजनीतिक नैरेटिव तैयार कर दिया है, जिसका इस्तेमाल आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।
एक कदम की नाराजगी, विपक्ष के लिए कई कदम का मौका
दरअसल, कांग्रेस की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती यही है कि खड़गे जैसे राष्ट्रीय नेता की सभा के बाद पार्टी को सरकार के खिलाफ अपने मुद्दों को आगे बढ़ाना था। इसके बजाय पार्टी खुद ही रक्षात्मक स्थिति में आ गई।
यानी कांग्रेस के लिए जो मंच भाजपा सरकार पर हमला करने का अवसर था, उसी के आसपास पैदा हुए विवाद ने भाजपा को कांग्रेस पर पलटवार का मौका दे दिया।
राजनीति में इसे विपक्ष को बैठे-बिठाए मिला मुद्दा कहा जा सकता है। यदि एसएसपी कार्यालय का विवाद नहीं होता, कार्यकर्ताओं का हंगामा नहीं होता और जनसभा में कथित विवादित टिप्पणियों का मुद्दा सामने नहीं आता, तो संभवतः भाजपा को इतनी जल्दी और इतने आक्रामक अंदाज में कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलने का अवसर नहीं मिलता।
अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस पूरे विवाद को प्रशासनिक कार्रवाई का मुद्दा बनाकर वापस भाजपा के पाले में डालती है या भाजपा द्वारा बनाए जा रहे सनातन और मर्यादा के नैरेटिव का राजनीतिक जवाब देने में सफल होती है। यही तय करेगा कि शनिवार की खड़गे सभा का राजनीतिक लाभ आखिर कांग्रेस को मिलता है या उसके बाद पैदा हुआ विवाद भाजपा के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।
