Connect with us

Uncategorized

पहले जेल, फिर नियुक्ति का खेल, मगर आदेश फिर फेल, विवादों के डॉ मृत्युंजय मिश्रा की नियुक्ति निरस्त, चर्चाओं में रहा है मामला

खबर शेयर करें -

देहरादून । शासन ने चर्चित अधिकारी डॉ मृत्युंजय मिश्रा को विशेष कार्यधिकारी पद पर बहाली के आदेश को वापस ले लिया है। विवादों में रहने वाले डॉ मिश्रा कि नियुक्ति के बाद से ही शासन kके फैसले पर सवाल उठने लगे थे जिसके बाद शासन को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा है।

उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव और कई मामलों में चर्चित रहे डॉ मृत्युंजय मिश्रा को आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग में विशेष कार्याधिकारी आयुष (ओएसडी) बनाया गया। अपर सचिव आयुष डॉ. विजय जोगदंडे की ओर से 26 जून को जारी आदेश जारी किया गया।आदेश के मुताबिक आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं, निदेशालय, देहरादून में सृजित ओएसडी (विशेष कार्याधिकारी आयुष) के 01 अस्थायी निःसंवर्गीय पद पर डॉ. मृत्युंजय कुमार को विशेष कार्याधिकारी के पद पर अग्रिम आदेश तक तैनाती दे दी है जिनका वेतन मान 144200-218200 वेतन लेवल-15 होगा।

इस आदेश के जारी होने के साथ ही यह खबर सत्ता के गालियारों में तेजी से दौड़नी शुरू हुई और मामला फिर विवादों में घिर गया। इसके बाद शासन को कदम पीछे खींचने पड़े और डॉ मिश्रा को फिर से निदेशालय सम्बद्ध कर दिया गया. बताया जाता है कि मुख्यमंत्री धामी भी इस नियुक्ति से नाराज थे।

उल्लेखनीय है कि डॉ मृत्युंजय मिश्रा पूर्व में उच्च शिक्षा विभाग के कर्मचारी थे और फिर उन्हें आयुर्वेद विवि के कुलसचिव पद पर मर्ज कर दिया गया था। त्रिवेन्द्र सिंह रावत की सरकार में उनके खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू हुई और निलंबित भी किया गया। इस मामले में मिश्रा जेल भी रहे और बहाल होने पर मौजूदा सरकार ने उन्हें फिर से आयुर्वेद विवि का कुलसचिव नियुक्त कर दिया गया। इसके बावजूद ज्वाइन नहीं करने दिया। इस पर मिश्रा को शासन में अटैच कर दिया गया।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

More in Uncategorized

Recent Posts

Facebook

Trending Posts