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जागेश्वर धाम में जाने से पहले सुरक्षा के लिए नए नियम जरूर पढ़ लें, अब मंदिर में कोई निजी सार्वजनिक आयोजन भी नहीं होगा

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जागेश्वर धाम में सख्ती: शस्त्र , ड्रोन, कैमरा, ट्राइपॉड व मोबाइल पर प्रतिबंध

 

अल्मोड़ा। जागेश्वर धाम मंदिर परिसर की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब परिसर में किसी भी प्रकार के शस्त्र ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और बिना अनुमति ड्रोन कैमरा, कैमरा, मोबाइल, ट्राइपॉड या अन्य रिकॉर्डिंग उपकरणों के उपयोग पर भी रोक लगा दी गई है। मंदिर परिसर में सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद श्रद्धालुओं का प्रवेश पूर्ण रूप से वर्जित रहेगा, ताकि धार्मिक मर्यादा और अनुशासन बना रहे।

 

 

यह सख्ती हाल ही में सामने आई एक गंभीर घटना के बाद की गई है, जिसमें बताया गया कि बीते दिनों मंदिर के गर्भगृह तक असलहा पहुंचने का मामला सामने आया था। जानकारी के अनुसार 19 अप्रैल को बरेली (यूपी) से आए एक होमगार्ड के साथ उसका गनर भी मंदिर में पहुंचा और उसका हथियार गर्भगृह तक चला गया। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी नाराजगी जताई गई और इसे मंदिर की परंपराओं के उल्लंघन के रूप में देखा गया। मामले के सामने आने के बाद संबंधित व्यक्ति ने इसे भूलवश हुई गलती बताते हुए खेद भी जताया, वहीं मंदिर के पुजारियों और प्रबंधन से जुड़े लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

 

 

इसी के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने तत्काल संज्ञान लेते हुए मंदिर परिसर के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। परिसर के बाहर सूचना बोर्ड लगाकर श्रद्धालुओं को नियमों की जानकारी दी जा रही है और स्पष्ट किया गया है कि मंदिर क्षेत्र में किसी भी तरह की बैठक, पार्टी, मनोरंजन कार्यक्रम, शादी, जन्मदिन या सालगिरह जैसे आयोजनों की अनुमति नहीं होगी। साथ ही श्रद्धालुओं को पालतू जानवर साथ लाने पर भी रोक रहेगी और परिसर में शराब के सेवन के बाद प्रवेश पूरी तरह निषिद्ध रहेगा।

 

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना लगाने से लेकर कानूनी दंड तक का प्रावधान किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य केवल जागेश्वर धाम की धार्मिक गरिमा, प्राचीन विरासत और पवित्रता को बनाए रखना है, ताकि श्रद्धालु शांत, सुरक्षित और अनुशासित वातावरण में पूजा-अर्चना कर सकें।

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