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Weekend Hill Station लैंसडौन के अस्तित्व पर खतरा! 20 साल में आधा क्यों रह गया उत्तराखंड का शहर?

पौड़ी. जनपद के हिल स्टेशन लैंसडौन को उत्तराखंड के पर्यटन नक्शे पर खास छवि के लिए जाना जाता है. हर वीकेंड बड़ी तादाद में पर्यटक इस हिल स्टेशन का रुख करते हैं. यहां कुदरत के बिखरे हुए नज़ारे और सौंदर्य हर किसी का मन मोह लेते हैं, लेकिन यह जानकर आपको ताज्जुब होगा कि यही लैंसडौन खत्म होता जा रहा है. यहां पर्यटकों की संख्या तो अच्छी बनी हुई है, लेकिन लोकल आबादी लगातार घट रही है. बड़ी संख्या में लैंसडौन के लोग कोटद्वार और आसपास के दूसरे इलाकों में शिफ्ट होते जा रहे हैं.

एक अनुमान के मुताबिक पिछले 20 सालों में लैंसडौन की आबादी 50 फीसदी से भी ज्यादा घट चुकी है. दरअसल इसके पीछे की मुख्य वजह है लैंसडौन का कैंट एरिया. नगर का मेन एरिया कैंट क्षेत्र आता है, जहां आज भी कैंट के सख्त कानून लागू होते हैं. साथ ही सुविधाओं के नाम पर लैंसडौन में ना अच्छा हॉस्पिटल है और ना ही पढ़ाई की कोई बेहतर व्यवस्था. स्थानीय निवासी अनुज खंडेलवाल भी कहते हैं कि बुनियादी सुविधाओं के लिए ही लोगों को पलायन करना पड़ रहा है.

Weekend Hill Station लैंसडौन के अस्तित्व पर खतरा! 20 साल में आधा क्यों रह गया उत्तराखंड का शहर?

वहीं लैंसडौन विधायक दिलीप सिंह रावत भी मानते हैं कि कैंट एरिया के चलते इलाके का विकास नहीं हो पाया और नगर के आम लोग परेशान हैं. हालांकि रावत ने कहा कि इस मामले में रक्षा मंत्रालय से बात की जा रही है ताकि इस क्षेत्र की आबादी के पलायन को रोकने के लिए यहां समुचित विकास कार्य किए जा सकें.

गौरतलब है कि लैंसडौन नगर गढ़वाल राइफल्स का मुख्यालय होने के साथ ही उत्तराखंड में सांस्कृतिक व कला के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान रखता है. इसके साथ ही, गर्मियों के मौसम में यह पर्यटकों की पसंद का हिल स्टेशन भी रहा है. इस सीज़न में भी यहां और आसपास के तमाम होटल व रिज़ॉर्ट आदि की बुकिंग फुल चल रही है और देश भर के राज्यों से पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं.

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