Connect with us

Uncategorized

हाईकोर्ट ने बीस साल पुराना आदेश किया रद्द, पत्नी के हत्यारे को सुनाई सज़ा

खबर शेयर करें -

उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दहेज हत्यारोपी पति को 20 वर्ष पूर्व बरी किये गए जाने के आदेश को रद्द करते हुए आरोपी को सात साल के कठोर कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति आर सी खुल्बे की खंडपीठ में हुई।
मामले के अनुसार 7 जून 2002 को अपर सत्र न्यायाधीश उधमसिंहनगर ने दहेज हत्यारोपी पति को दोषमुक्त करार दिया था। जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने करीब 20 वर्ष बाद हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए आरोपी को दहेज हत्या का दोषी ठहराया और उसे सात साल के कठोर कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दहेज उत्पीड़न अधिनियम के मुताबिक यदि शादी के सात साल के भीतर किसी महिला की जलने अथवा मारपीट से मौत होती है, महिला ने दहेज के लिये ससुराल में मारपीट, प्रताड़ना होने की शिकायत की हो तो ऐसे मामले में दहेज उत्पीड़न या दहेज हत्या का जुर्म होता है। लेकिन निचली अदालत ने इस तथ्य को नजरअंदाज किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 30 जुलाई 2001 को चौकी मझौला खटीमा में सुनील कुमार यादव पुत्र जयराम यादव निवासी शांतिनगर विलासपुर, रामपुर ने रिपोर्ट लिखाई कि उसकी बहन की शादी राजेन्द्र सिंह यादव निवासी भिलिया जैमुर खटीमा के साथ जून 1998 में हुई। लेकिन शादी के बाद से ही राजेन्द्र सिंह द्वारा उसकी बहन को दहेज के लिये प्रताड़ित किया गया और उसकी हत्या से 20 दिन पूर्व 30 हजार रुपये दहेज के लिये दिए और बाकी रुपये रक्षाबंधन के दिन देने का वायदा किया। लेकिन इससे पहले ही उसकी बहन के ऊपर केरोसिन छिड़ककर आग लगा कर जला दिया।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

More in Uncategorized

Recent Posts

Facebook

Trending Posts