Connect with us

Uncategorized

महिलाओं को मिलने वाला आरक्षण निरस्त होना राज्य सरकार की नाकामीः यशपाल आर्य

खबर शेयर करें -

बाजपुर। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा राज्य आंदोलनकारियों के बाद राज्य की महिलाओं को मिलने वाले आरक्षण के लाभ को उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त किया जाना राज्य सरकार की असपफलता है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के सैकड़ों सरकारी वकीलों की पफौज कांग्रेस की सरकारों द्वारा दिए गए इन दो विशिष्ट वर्गों को मिलने वाले आरक्षण की सही पैरवी न्यायालय में नहीं कर पाई साथ सरकार ने अध्यादेश या विधेयक के माध्यम से महिला आरक्षण के लिए कानून भी नहीं बनाया।

यशपाल आर्य ने कहा कि हाल के उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद राज्य की महिलाओं को सरकारी सेवाओं में मिल रहा 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण समाप्त हो गया है। इसी तरह कुछ साल पहले राज्य आंदोलनकारियों को नौकरियों में मिलने वाला आरक्षण भी उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद समाप्त हो गया था। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय ने उस शासनादेश को निरस्त कर दिया है जिसके आधार पर राज्य की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 पफीसदी क्षैतिज आरक्षण का लाभ मिलता था। आर्य ने बताया कि कांग्रेस की एनडी तिवारी सरकार ने राज्य की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण देने का फैसला किया था। सरकार के फैसले को जमीन पर उतारने के लिए 24 जुलाई 2006 को तत्कालीन मुख्य सचिव एनएस नपलच्याल की ओर से शासनादेश जारी कर उत्तराखंड की राज्याधीन सेवाओं, निगमों, सार्वजनिक उद्यमों, स्वायत्तशासी संस्थानों में राज्य की महिलाओं को 18 जुलाई 2001 के शासनादेश के अनुसार मिलने वाले 20 आरक्षण को बढ़ाकर 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण कर दिया था। आर्य ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के इस निर्णय से तब से लेकर अब तक उत्तराखण्ड की हजारों महिलाओं को राज्य की हर सेवा में अवसर मिला लेकिन राज्य की बर्तमान भाजपा सरकार न्यायालय में राज्य की महिलाओं के हितों की रक्षा करने में असफल रही।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

More in Uncategorized

Recent Posts

Facebook

Trending Posts