उत्तराखण्ड
व्यापार मंडल में दोफाड़! हल्द्वानी सम्मेलन से पहले भाजपा बनाम कांग्रेस का सियासी एंगल?
व्यापार मंडल में दोफाड़! हल्द्वानी सम्मेलन से पहले भाजपा बनाम कांग्रेस का सियासी एंगल?
हल्द्वानी महानगर की पूरी निर्वाचित टीम ने छोड़ा प्रांतीय संगठन, योगेश शर्मा और मनोज जायसवाल ने लगाए वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप
हल्द्वानी। प्रदेश के सबसे बड़े व्यापारी संगठनों में शुमार प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल में 9 अक्टूबर को होने वाले वार्षिक सम्मेलन से ठीक पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हल्द्वानी महानगर की पूरी निर्वाचित टीम ने प्रांतीय संगठन से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया है। महानगर अध्यक्ष योगेश शर्मा और महामंत्री मनोज जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संगठन से अलग होने की घोषणा करते हुए जिला और प्रदेश नेतृत्व पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। इस घटनाक्रम ने व्यापार मंडल के भीतर चल रही खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है।
लेकिन इस टूट के साथ एक दूसरा सवाल भी तेजी से उठने लगा है—क्या व्यापार मंडल का यह विवाद सिर्फ संगठनात्मक और वित्तीय मुद्दा है या इसके पीछे राजनीतिक समीकरण भी काम कर रहे हैं?
दरअसल, महानगर अध्यक्ष योगेश शर्मा की राजनीतिक पृष्ठभूमि कांग्रेस से जुड़ी रही है। दूसरी ओर प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष नवीन वर्मा की मौजूदा राजनीतिक सक्रियता भाजपा सरकार से जुड़ी हुई है और वह राज्य सरकार में दायित्वधारी भी हैं। ऐसे में संगठन के भीतर सामने आई दोफाड़ को लेकर व्यापारी राजनीति के साथ-साथ भाजपा-कांग्रेस के राजनीतिक समीकरणों की चर्चा भी तेज हो गई है।
हालांकि महानगर टीम ने अपने फैसले के पीछे मुख्य वजह वित्तीय अनियमितताओं और संगठनात्मक मामलों को बताया है। इन आरोपों को लेकर प्रांतीय नेतृत्व का पक्ष सामने आना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। इसलिए फिलहाल इसे सीधे राजनीतिक टकराव का परिणाम मानने के बजाय संगठनात्मक विवाद के बीच उभर रहे राजनीतिक एंगल के तौर पर देखा जा रहा है।
जिस मंच पर साथ दिखना था, वहीं से अलग हुआ महानगर
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 9 अक्टूबर को हल्द्वानी में प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल का बड़ा वार्षिक सम्मेलन होने जा रहा है। सम्मेलन में प्रदेशभर से व्यापारिक प्रतिनिधियों के जुटने की तैयारी है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भी कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे समय में हल्द्वानी महानगर की पूरी निर्वाचित टीम का संगठन से अलग होना प्रांतीय नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
महानगर अध्यक्ष योगेश शर्मा और महामंत्री मनोज जायसवाल का खुलकर सामने आना और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाना इस विवाद को और गंभीर बना रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रांतीय नेतृत्व इन आरोपों पर क्या जवाब देता है।
व्यापारी संगठन या राजनीति का नया अखाड़ा?
हल्द्वानी में व्यापार मंडल की राजनीति लंबे समय से प्रभावशाली रही है। ऐसे में महानगर और प्रांतीय नेतृत्व के बीच आई यह दूरी केवल संगठन की आंतरिक लड़ाई तक सीमित रहती है या इसके पीछे राजनीतिक खेमेबंदी भी आकार लेती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
एक तरफ कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले योगेश शर्मा का नेतृत्व और दूसरी तरफ भाजपा सरकार से जुड़े दायित्वधारी नवीन वर्मा का प्रांतीय नेतृत्व—इन दोनों राजनीतिक संदर्भों ने विवाद को एक नया कोण दे दिया है। यही वजह है कि 9 अक्टूबर का सम्मेलन अब सिर्फ व्यापारियों का सम्मेलन नहीं रह गया है, बल्कि व्यापार मंडल के भीतर शक्ति-संतुलन और नेतृत्व की लड़ाई का अगला मंच भी बनता दिखाई दे रहा है।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि महानगर टीम ने संगठन क्यों छोड़ा, बल्कि बड़ा सवाल यह भी है कि व्यापार मंडल में यह दोफाड़ आखिर कहां तक जाएगी और क्या इसका असर प्रदेशभर की व्यापारिक राजनीति पर भी पड़ेगा?इस संस्करण में “भाजपा बनाम कांग्रेस” को तथ्य की तरह नहीं बल्कि राजनीतिक एंगल/उठते सवाल के रूप में रखा गया है, जिससे खबर धारदार भी रहेगी और आरोप को निष्कर्ष की तरह पेश करने से भी बचा रहेगा।