उत्तराखण्ड
रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज को मिली बड़ी राहत, 2027-28 से 100 MBBS सीटों पर शुरू हो सकेगा संचालन
पहले एनएमसी से नहीं मिल पाई थी मान्यता, कमियों को दूर कर दोबारा किया गया था आवेदन; केंद्र के निर्देश के बाद खुला रास्ता
रुद्रपुर/देहरादून। उत्तराखंड में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में रुद्रपुर स्थित पंडित रामसुमेर शुक्ल स्मृति राजकीय मेडिकल कॉलेज को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से कॉलेज में 100 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालन का रास्ता साफ होने की जानकारी दी गई है। इस संबंध में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को आवश्यक निर्देश दिए हैं। इससे कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने की दिशा में चल रही प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
पहले आवेदन पर नहीं मिली थी मान्यता
रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए पहले भी मान्यता की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था, लेकिन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की ओर से पूर्व में अनुमति नहीं मिल सकी थी। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन और संबंधित विभागों ने आवश्यक कमियों को दूर करने की दिशा में काम किया। मेडिकल कॉलेज में जरूरी संसाधनों, शिक्षकों और अन्य स्टाफ की उपलब्धता समेत निर्धारित मानकों को पूरा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। आवश्यक तैयारियां पूरी करने के बाद कॉलेज की ओर से दोबारा आवेदन किया गया।
अब केंद्र सरकार की ओर से एनएमसी को दिए गए निर्देशों के बाद कॉलेज में 100 एमबीबीएस सीटों के साथ शैक्षणिक सत्र 2027-28 से संचालन की संभावना का रास्ता खुला है। हालांकि, कॉलेज की अंतिम नियामकीय अनुमति और संचालन से जुड़ी औपचारिकताओं की स्थिति की पुष्टि संबंधित आधिकारिक आदेश से की जानी जरूरी है।
कुमाऊं में चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा विस्तार
रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटें शुरू होने से ऊधमसिंह नगर समेत आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर मिल सकते हैं। इससे राज्य में मेडिकल सीटों की उपलब्धता बढ़ाने और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के प्रति आभार व्यक्त किया गया है। कॉलेज का संचालन शुरू होने से क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने के साथ सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।