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 पढ़ें पूरी खबर,सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: अनुकंपा के आधार पर अधिकार नहीं है नौकरी

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी अधिकार नहीं रियायत है और ऐसे रोजगार देने का उद्देश्य प्रभावित परिवार को अचानक संकट से उबारने में सक्षम बनाना है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में पिछले हफ्ते केरल हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच के फैसले को भी रद्द कर दिया। डिवीजन के फैसले में सिंगल जज के उस फैसले की पुष्टि की गई थी, जिसमें फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर लिमिटेड और अन्य को अनुकंपा के आधार पर एक महिला की नियुक्ति के मामले पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।

जस्टिस एम.आर. शाह और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने आदेश में कहा कि महिला के पिता फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर लिमिटेड में कार्यरत थे और ड्यूटी के दौरान ही उनकी अप्रैल 1995 में मृत्यु हो गई थी। बेंच ने कहा कि उनकी मृत्यु के समय उनकी पत्नी नौकरी कर रही थीं, इसलिए याचिकाकर्ता अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की पात्र नहीं हैं।

अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की हकदार नहीं

बेंच ने कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के 24 साल बाद प्रतिवादी अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की हकदार नहीं होगी। अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पष्ट किए गए कानून के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत सभी उम्मीदवारों को सभी सरकारी रिक्तियों के लिए समान अवसर प्रदान किया जाना चाहिए।

संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के सामने समानता है और अनुच्छेद 16 सरकारी रोजगार के मामलों में अवसर की समानता से संबंधित हैं। बेंच ने 30 सितंबर के अपने आदेश में कहा, हालांकि, मृतक कर्मचारी के आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति इन मानदंडों का अपवाद है। अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति एक रियायत है और यह अधिकार नहीं है।

पिता की मौत के समय नाबालिग थी बेटी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी की 1995 में मृत्यु हुई थी, तब उसकी बेटी नाबालिग थी। अदालत ने कहा कि वयस्क होने पर उसने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन किया। यह भी नोट किया गया कि उनकी मृत्यु के लगभग 14 साल बाद उनकी बेटी ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए एक आवेदन प्रस्तुत किया था।

सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों का हवाला देते हुए बेंच ने कहा कि निर्धारित कानून के अनुसार, अनुकंपा नियुक्ति सार्वजनिक सेवाओं में नियुक्ति के सामान्य नियम के लिए एक अपवाद है और एक व्यक्ति के आश्रितों के पक्ष में है जो गरीबी में और आजीविका के किसी भी साधन के बिना अपने परिवार को छोड़कर मर जाते हैं।

लाभकारी रोजगार प्रदान करने का प्रावधान

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में विशुद्ध मानवीय विचार से मृतक के आश्रितों में से एक को लाभकारी रोजगार प्रदान करने का प्रावधान किया गया है, जो इस तरह के रोजगार के लिए पात्र हो सकता है। बेंच ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर रोजगार देने का पूरा उद्देश्य परिवार को अचानक संकट से उबारने में सक्षम बनाना है। उद्देश्य ऐसे परिवार को मृतक के पद से कम पद देना नहीं है।

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