उत्तराखण्ड
उत्तराखंड में राष्ट्रीय बाल विज्ञान सम्मेलन की तैयारियां शुरू, 10 से 17 वर्ष के विद्यार्थियों का पंजीकरण जारी
उत्तराखंड में राष्ट्रीय बाल विज्ञान सम्मेलन की तैयारियां शुरू, 10 से 17 वर्ष के विद्यार्थियों का पंजीकरण जारी
‘Science and Innovation for Sustainability’ थीम पर होंगे शोध प्रोजेक्ट, जिला से राष्ट्रीय स्तर तक मिलेगा प्रतिभा दिखाने का मौका
देहरादून/अल्मोड़ा/हल्द्वानी। उत्तराखंड के स्कूली विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और अनुसंधान की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बाल विज्ञान सम्मेलन (एनसीएससी) 2026-27 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद (एनसीएसटीसी) के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के लिए राज्य में विद्यार्थियों का ऑनलाइन पंजीकरण प्रारंभ हो चुका है।
उत्तराखंड में सम्मेलन के जिला एवं राज्य स्तरीय आयोजन का दायित्व गोल्डन न्यू एरा एजुकेशनल एंड सोशल सोसाइटी, ताकुला (अल्मोड़ा) को सौंपा गया है। संस्था राज्यभर के विद्यालयों में जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यशालाएं और मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित करेगी।
इस वर्ष सम्मेलन की थीम “Science and Innovation for Sustainability” रखी गई है। इसके तहत 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थी जल संरक्षण, पर्यावरण, जैव विविधता, कृषि, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, हिमालयी पारिस्थितिकी और स्थानीय समस्याओं पर वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार करेंगे। उत्कृष्ट परियोजनाओं का चयन जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर किया जाएगा।
कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग vijAI Robotics Pvt. Ltd. प्रदान करेगी। कंपनी के सीईओ पार्थसार्थी जोशी ने कहा कि बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करना समय की आवश्यकता है।
गोल्डन न्यू एरा के प्रोजेक्ट प्रभारी एवं Chief Data Scientist डॉ. अरविंद जोशी ने बताया कि यह केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि उत्तराखंड में वैज्ञानिक चेतना और नवाचार को बढ़ावा देने का व्यापक अभियान है। उन्होंने बताया कि 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थी जूनियर (10-14 वर्ष) और सीनियर (14-17 वर्ष) श्रेणी में भाग ले सकते हैं।
सोसायटी के अध्यक्ष राजेश पंत ने राज्य के सभी सरकारी, अशासकीय और निजी विद्यालयों से अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इस राष्ट्रीय कार्यक्रम से जोड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य उत्तराखंड के हर जिले से बाल वैज्ञानिक तैयार करना और उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना है।
