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प्रेम चंद अग्रवाल को कैबिनेट से बर्खास्त करने की मांग, बैकडोर भर्ती मामले में दर्ज हो मुकदमा

देहरादून: विधानसभा अध्यक्ष की ओर से विधानसभा में हुई 200 से अधिक नियुक्तियाँ निरस्त किये जाने से स्पष्ट है कि उक्त नियुक्तियाँ बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के की गयी. इसलिए ये नियुक्तियाँ भ्रष्टाचार की श्रेणी में आती हैं.

भाकपा (माले) के गढ़वाल सचिव कॉमरेड इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि इस संदर्भ में 19 सितंबर को भाकपा (माले) की ओर  विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिख कर कहा था कि विधानसभा के पूर्व अध्यक्षों द्वारा जितनी भी नियुक्तियाँ की गयी हैं, वे बिना पारदर्शिता के हैं और उनमें भाई-भतीजावाद हुआ है. इसलिए इस मामले में अवैध नियुक्ति करने वाले पूर्व अध्यक्षों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण

अधिनियम,1988 और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए. 2000 से 2011 तक की नियुक्तियों को भी इस दायरे में लाते हुए मुकदमा दर्ज किया जाए.

उन्होंने कहा कि चूंकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वर्तमान संसदीय कार्य मंत्री प्रेम चन्द्र अग्रवाल द्वारा विधानसभा में की गयी नियुक्तियों में भ्रष्टाचार होने की पुष्टि विधानसभा अध्यक्ष की कार्यवाही से हो गयी है, इसलिए प्रेम चंद्र अग्रवाल को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए.

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