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बचपन में ही दिल की सेहत पर नजर: 9 से 11 साल की उम्र में पहली बार कोलेस्ट्रॉल जांच की सलाह, बदली स्वास्थ्य गाइडलाइन
बचपन में ही दिल की सेहत पर नजर: 9 से 11 साल की उम्र में पहली बार कोलेस्ट्रॉल जांच की सलाह, बदली स्वास्थ्य गाइडलाइन
नई दिल्ली। दिल की बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए अब बचपन से ही कोलेस्ट्रॉल की जांच पर जोर दिया जा रहा है। अमेरिका के प्रमुख हृदय संस्थानों ने नई गाइडलाइन जारी करते हुए 9 से 11 वर्ष की उम्र के सभी बच्चों की कम से कम एक बार कोलेस्ट्रॉल जांच कराने की सलाह दी है।
American College of Cardiology और American Heart Association की नई सिफारिशों में कहा गया है कि दिल की बीमारियों की रोकथाम केवल उम्र बढ़ने के बाद नहीं, बल्कि बचपन से शुरू करनी होगी।
कम उम्र में बढ़ रहा हार्ट का खतरा
नई गाइडलाइन के अनुसार, धमनियों में फैट जमा होने की प्रक्रिया कई लोगों में बचपन से ही शुरू हो सकती है। ऐसे में समय रहते जांच कराने से हाई कोलेस्ट्रॉल और आनुवंशिक लिपिड विकारों की पहचान की जा सकती है, जिससे भविष्य में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी।
19 साल के बाद नियमित लिपिड प्रोफाइल की सलाह
गाइडलाइन में 19 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों को समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल जांच कराने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड, मोटापा, तनाव, कम शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान और शराब के सेवन से युवाओं में भी हृदय रोग का खतरा बढ़ रहा है।
तीन नई जांचों पर भी जोर
नई सिफारिशों में सामान्य कोलेस्ट्रॉल जांच के साथ कुछ विशेष टेस्ट पर भी ध्यान दिया गया है। इनमें लिपोप्रोटीन (ए), एपोलिपोप्रोटीन-बी और कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम (सीएसी) स्कैन शामिल हैं। इन जांचों से हृदय रोग के छिपे जोखिम का बेहतर आकलन किया जा सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह—बदलें जीवनशैली
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दिल को स्वस्थ रखने के लिए बचपन से ही संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण जैसी आदतों को अपनाना जरूरी है। कम उम्र में बढ़ते हृदय रोगों को देखते हुए अब बचाव को इलाज से ज्यादा अहम माना जा रहा है।
