उत्तराखण्ड
आखिर क्यों हरीश रावत ने खाई मां की सौगंध…. उम्र के इस पड़ाव में क्यों खोलना पड़ गया भावनाओं का मोर्चा
देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में बीते कुछ दिनों से चल रहे घटनाक्रम के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने शुक्रवार को बेहद भावुक अंदाज में अपना पक्ष रखा। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में रावत ने मां की सौगंध लेते हुए अपने ऊपर लगाए जा रहे नौकरी या किसी लाभ के बदले पैसे लेने के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी को नौकरी दिलाने के बदले एक पैसा लेना तो दूर, उससे चाय-पानी तक नहीं पिया।
रावत के इस भावुक बयान के बाद उत्तराखंड की कांग्रेस की सियासत में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हाल के दिनों में उनके पूर्व ओएसडी और सहयोगी चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई और उसके बाद रावत की ओर से कांग्रेस के महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफे की घोषणा के बीच अब उनका यह बयान सामने आया है।
रावत ने अपने संदेश में कहा कि उनकी तीन माताएं हैं—जगत जननी देवी भवानी, जिनकी वह नित्य पूजा करते हैं, और धरती मां उत्तराखंड, जिसने उन्हें जन्म दिया। उन्होंने कहा कि उम्र के इस पड़ाव में उन पर कलंक लगाने का प्रयास किया जा रहा है और कुछ पोस्टों तथा अखबारों के जरिये उनके खिलाफ मुहिम चलाए जाने की बात कही।
उन्होंने कहा, “मां मैं आपकी और आपके दूध की सौगंध खाता हूं, मैंने कभी किसी को नौकरी देने के बदले एक पैसा लेना तो छोड़िए, मैंने उससे कभी चाय और पानी तक नहीं पिया। जिसको दिया होगा, मैंने दिया होगा मां। मैंने कभी नौकरी के बदले किसी से कुछ लिया नहीं।”
रावत ने आरोप लगाया कि आज उनके ऊपर कलंक का टीका लगाने का दुस्साहस किया जा रहा है और यह सब नियोजित तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने 2017 और 2022 का भी जिक्र करते हुए कहा कि उन वर्षों में भी उनके खिलाफ झूठ गढ़े गए, लेकिन उनके अनुसार उन आरोपों के कोई साक्ष्य नहीं हैं।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह इस कलंक के साथ मरना नहीं चाहते। रावत ने कहा कि उन्होंने मां जगदंबा से प्रार्थना की है कि जब तक वह इस कलंक को धो न दें, तब तक उनकी जिंदगी की डोर और सांसों को आगे बढ़ाते रहें। उन्होंने कहा कि वह संघर्ष करेंगे।
राजनीतिक पद और सिफारिशों के बदले सौदे से भी इनकार
पूर्व मुख्यमंत्री ने केवल नौकरी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक पद देने के बदले भी पैसा लेने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने हजारों-हजार लोगों की विभिन्न कामों और रोजगार आदि के लिए सिफारिश की है, लेकिन कभी किसी से इसके बदले सौदा नहीं किया।
रावत ने कहा कि लोग उनकी मदद जरूर करते हैं और आज भी उनकी मदद कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने अपने साथ लंबे समय तक रहे चंदन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने छाया की तरह उनके साथ इतने वर्षों तक सेवा की, आज उसकी जिंदगी भर की कमाई सीज कर दी गई है। रावत ने कहा कि चंदन को अपने बच्चों को पढ़ाना है और उनकी आजीविका चलानी है, जिसकी उन्हें अलग चिंता हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास खुद भी इतने साधन नहीं हैं कि वह अपने घर का खर्च उठा सकें।
“किसी चीज के बदले पैसा लिया हो तो मां मुझे श्राप दे”
अपने वीडियो संदेश के सबसे भावुक हिस्से में रावत ने दोबारा मां की सौगंध लेते हुए कहा कि यदि उन्होंने किसी चीज के बदले पैसा लिया हो तो मां उन्हें श्राप दें कि उन्होंने अपने दूध को लज्जित करने का काम किया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने हर काम को मां को साक्षी मानकर और उनके आदेश से किया है। रावत ने कहा कि शरीर साथ दे या न दे, स्वास्थ्य आज्ञा दे या न दे, लेकिन अपनी सफाई देने और अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्हें जनता के बीच जाना ही पड़ेगा।
उन्होंने कहा, “मां, मैं फिर आपकी सौगंध खाकर कह रहा हूं कि किसी चीज के बदले पैसा लिया हो, मां श्राप देकर कहना कि हरीश, तूने मेरे दूध को लज्जित करने का काम किया।”
अंत में रावत ने मां से बार-बार अपनी रक्षा की प्रार्थना की और कहा कि वह इस लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।
ईडी कार्रवाई के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव
गौरतलब है कि उत्तराखंड की 2016 ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में ईडी ने हरीश रावत के पूर्व ओएसडी और वर्तमान निजी सहायक रहे चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर कार्रवाई की थी। कार्रवाई में नकदी, सोना और महंगी घड़ियों समेत संपत्तियों के जब्त किए जाने की खबर सामने आई थी।
इस घटनाक्रम के बाद हरीश रावत ने कांग्रेस के उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी पद और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। रावत ने तब कहा था कि वह नहीं चाहते कि उनके या उनके सहयोगी से जुड़े मामले की वजह से कांग्रेस की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कमजोर हो।
अब मां की सौगंध लेकर सामने आए रावत के ताजा बयान ने इस पूरे प्रकरण को एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। रावत ने जहां अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए संघर्ष जारी रखने की बात कही है, वहीं उनके इस भावुक संदेश के बाद कांग्रेस के भीतर और बाहर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज होने के संकेत हैं।

