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 केंद्रीय विद्यालयों में बड़े स्तर पर शिक्षकों के तबाले, उत्तर से सीधे दक्षिण भारत में भेजे

देहरादून: उत्तराखंड समेत देशभर में केंद्रीय विद्यालयों में बड़े स्तर पर शिक्षकों के तबादले कर दिए गए हैं। इन तबादलों से शिक्षकों के साथ ही अभिभावक और छात्र भी परेशान हैं। शिक्षकों के अचानक ट्रांसफर से खुद शिक्षक भी हैरान हैं। इन तबादलों के लिए नियमों का पालन भी नहीं किया गया है। उनका कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है।

केंद्रीय विद्यालय राष्ट्रीय शिक्षक संघ की केंद्रीय विद्यालय संगठन के साथ एक बैठक हुई थी, जिसमें यह तय किया गया था कि 40 साल से अधिक उम्र के शिक्षक/शिक्षिकाओं का ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। बावजूद, शिक्षकों के ट्रांसफर कर दिए गए। अचानक हुए ट्रांसफर से शिक्षक भी हैरान हैं।

नियमानुसार शिक्षकों को पहले अवगत कराया जाता था। विकल्प भी पूछे जाते थे। लेकिन, अब जिस तरह से ट्रांसफर किए गए हैं। उस प्रक्रिया में विकल्प पूछना तो दूर, किसी को जानकारी तक नहीं दी गई। सीधे ट्रांसफर ऑर्डर थमा दिए गए।

कई शिक्षक ऐसे भी हैं, जिनको सीधे दक्षिण भारत में भेज दिया गया है। जिससे उन स्कूलों के बच्चों को दिक्कत हो सकती है, जिन स्कूलों से ट्रांसफर किए गए हैं। साथ ही उन विद्यालयों के बच्चों को भी भाषाई दिक्कत होगी, जिनमें उत्तर भारत से हिन्दी भाषी शिक्षकों का ट्रांसफर कर दिया गया है।

तेलगु, कन्नड़ और तमिल भाषी क्षेत्रों के विद्यालयों में पढ़ाने के लिए स्थानीय भाषा सीखना जरूरी होगा। भाषा की समस्या के चलते छात्र-छा़त्राओं और शिक्षक दोनों ही दिक्कतें होंगी। हालांकि, अंग्रेजी माध्यम हो सकती है। लेकिन, भाषाई समस्या फिर भी बनी रहेगी। ऐसे में शिक्षकों के इस तरह से अचानक ट्रांसफर से दोहरा नुकसान हो रहा है।

देशभर से आ रही खबरों के अनुसार कई शिक्षकों ने केंद्रीय विद्यालय शिक्षा संगठन के फैसले के खिलाफ कोर्ट की शरण ली है। जबकि, कुछ शिक्षकों ने वीआरएस लेने का मन बना लिया है। कुछ ऐसे भी हैं, जिनके सामने कई तरह की चुनौतियां होने के कारण मजबूरी में ज्वाइन कर रहे हैं।

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