उत्तराखण्ड
काश,…कभी तो हवा ऐसी साफ़-सुथरी भी चले, सच क्या है, सबको और “उन्हें”भी पता तो चले ।
हल्द्वानी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी का एक फेसबुक पोस्ट फिर वायरल है। इस वायरस पोस्ट में उन्होंने कांग्रेस की वरिष्ठतम नेता के गणों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठतम नेता के सिस्टम से उनके खिलाफ गलत प्रचार किया जा रहा है और तमाम बातें दुष्प्रचारित की जा रही हैं जिससे उनका लेना एक न देना दो। प्रकाश जोशी की आप पोस्ट इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रकाश जोशी के पोस्ट एक दूसरे के खिलाफ माने जा रहे हैं। हरीश रावत का खेमा तो प्रकाश जोशी पर लगातार इनडायरेक्ट रूप से प्रहार कर ही रहा है तो उन बातों का जवाब प्रकाश जोशी खुद अपनी पोस्ट के माध्यम से दे रहे हैं जैसा कि इस पोस्ट में दिखाई दे रहा है…… यह रही पोस्ट
“साजिशों के दौर में इक हवा ऐसी भी चली’
फिर उसने वो भी सुना, जो मैंने कहा ही नही”
अपने 38 वर्ष की काँग्रेस की राजनीति से बहुत से अनुभवों में से एक सीख ये भी रही कि जब आप ग़लत नहीं हो तो बिना माँगे स्पष्टीकरण नहीं देना चाहिये । लेकिन कभी- कभी जब आपके ख़िलाफ़ एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत झूठी बातें फैलायी जा रही हों तब शायद आपकी मजबूरी हो जाती है कि सच सामने आये।
अभी हाल ही में दिल्ली में उत्तराखंड काँग्रेस के नेताओं की एक बैठक हुयी। बैठक में विभिन्न बातों के साथ कुछ लोगों की पार्टी में जॉइनिंग को लेकर प्रस्ताव आये । पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री हरीश रावत जी बीच बैठक के समाप्त होने से पहले बैठक से चले गये।
अगले ही दिन से आश्चर्यजनक रूप से दो बातें फैलाई गई:
1. बैठक में रावत जी प्रकाश जोशी की किसी बात से नाराज हो गये ।
2. प्रकाश जोशी ने श्री हरीश रावत जी द्वारा प्रस्तावित किसी नाम का विरोध किया। और चूँकि प्रकाश जोशी रामनगर से चुनाव लड़ना चाहते हैं, इसलिए जॉइनिंग का विरोध कर रहे हैं।
मैं यहाँ फिर से स्पष्ट कर दूँ कि ना मैं अपनी बात के माध्यम से कोई स्पष्टीकरण दे रहा हूँ और ना मुझे इसकी कोई ज़रूरत है, लेकिन पार्टी के सबसे “वरिष्ठ -“ तम” नेता के सिस्टम के लोग (गण) सच ना जानकर और सिर्फ़ झूठ का प्रचार करें, तो ये ग़लत है ।
उपरोक्त बातों में से कुछ भी सच नहीं था। और मुझे लड़ना ही होता तो 2022 में जब रामनगर सीट पर विवाद की स्थिति हुई थी तो मुझसे कहा गया था कि मैं रामनगर चुनाव लड़ूँ, लेकिन वो मेरा लक्ष्य नहीं था इसलिये नहीं लड़ा।
पार्टी के “वरिष्ठ-“तम” नेता के सिस्टम से मेरे ख़िलाफ़ एक षड्यंत्र के तहत झूठ का प्रचार किया गया, मेरा आहत होना स्वाभाविक था।
फिर मैंने “सुनील गावस्कर वनाम महेंद्र सिंह धोनी” के क्रिकेट कैरीअर की तुलना करते हुये समीक्षा की, जो कि एक सामान्य, General बात थी, कि सुनील गावस्कर ने देश के लिए खेलते-खेलते एक समय फिर सिर्फ़ अपने रिकॉर्ड्स के लिए खेलना शुरू कर दिया था, टीम का नुक़सान होना स्वाभाविक था। “वरिष्ठ-तम” “सिस्टम” ने उसे किसी के रिटायरमेंट से जोड़ दिया, जबकि सुनील गावस्कर तो अब भी रिटायर नहीं हुये बस उनकी भूमिका बदली है, कभी वो अच्छी कमेंट्री करते है, कभी क्रिकेट की अन्य गतिविधियों में शामिल रहते हैं।
भला राजनीति, खेल, साहित्य, संगीत इत्यादि क्षेत्रों में भला कोई रिटायरमेंट होती है?
कुछ “गणों “ ने प्रचार किया की प्रकाश जोशी, मुरली मनोहर जोशी जी के दूर का रिश्तेदार है, इसलिये रंजिश रखता है, अब इन गणों में इतनी ही समझ होती तो सही से पता करते कि जोशी जी तो मेरे रिश्तेदार नहीं थे लेकिन अल्मोड़ा के पूर्व सांसद श्री जीवन शर्मा जी ज़रूर मेरे दूर के रिश्तेदार थे जिन्होंने….!
फ़िलहाल “गावस्कर और धोनी” तक…
लेख लंबा हो तो बोरियत हो जाती है, तो “लीडर और पॉलिटिशियन” पर विस्तारित चर्चा जल्द ही…
शायद कई चरणों में…
और अब जाते – जाते…एक कहानी सुन लेते हैं…
एक गाँव में एक बार एक शादी थी, और इस गाँव से बारात दूसरे गाँव जानी थी। शादी से ठीक दो दिन पहले वधू पक्ष ने संदेश भिजवाया की बारात में सिर्फ़ 30 वर्ष से नीचे के ही बाराती आयेंगे, मरते क्या नहीं करते 30 वर्ष से नीचे के 60-70 लड़के बारात के लिए छाँट लिए गये। बारात जाने लगी तो गाँव के एक बुजुर्ग ने कहा कि ज़रूर ये कोई चाल है, तुम लोग भले ही संदूक में बंद करके ले जाओ लेकिन एक बुजुर्ग को साथ ले जाओ । खैर एक बुजुर्ग को संदूक में बंद करके बारात में ले जाया गया। जब बारात पड़ोसी गाँव में पहुचीं। तब लड़की वालों ने एक अजीब सी शर्त रख दी कि भोजन में हर बाराती को एक-एक बकरा खाना पड़ेगा मतलब 70 बाराती 70 बकरे खायेंगे। ये तो संभव नहीं था, भला एक व्यक्ति पूरा एक बकरा कैसे खा सकता था ! फिर उन्हें उस संदूक में बंद बुजुर्ग की याद आयी, बुजुर्ग व्यक्ति के समक्ष समस्या रखी गयी, उन्होंने कहा कि लड़की वालों से कहो कि उनकी शर्त मंजूर है लेकिन एक बार में एक ही बकरा परोसा जायेगा। ऐसा ही हुआ एक बार में एक बकरा परोसा गया और सारे बाराती मिलकर उसे खाते । धीरे – धीरे उन 70 लड़कों ने 70 बकरे खा लिये। लड़की वाले हैरान हुये, लेकिन साथ ही बोले ये संभव नहीं था, इसका मतलब तुम किसी बुजुर्ग को साथ लाये हो । खैर… जैसे तैसे लड़की विदा हुई ।
कहानी का सार ये है कि अगर उस बुजुर्ग ने भी ये जिद पकड़ ली होती कि बारात में सबसे आगे मैं ही नाचूँगा,
तो क्या शादी हो पाती? बुजुर्ग ने अपने स्वयं के नाचने का मोह छोड़कर बारात को मार्गदर्शन दिया और शादी सफलतापूर्वक संपन्न हो गयी ।
मैंने एक वरिष्ठ नेता को कहते सुना है कि मैं भले ही बुजुर्ग हो गया हूँ तो क्या हुआ मैं रात को ‘ख़ासने’ के काम तो आऊँगा, कम से कम चोर तो घर से दूर रहेंगे। कितनी सुंदर बात है।
लेकिन जब मंशा खाँसकर चोर भगाना न हो बल्कि जानबूझकर खाँसकर घर के बाक़ी लोगों की भी नींद ख़राब करना हो तब क्या ही कहना ।
काश,…कभी तो हवा ऐसी साफ़-सुथरी भी चले,
सच क्या है, सबको और “उन्हें”भी पता तो चले ।
(शेर ख़ुद ही बनाया है)
