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Uttarakhand Congress के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दिया इस्तीफा, कहा – राज्य में हार की जिम्मेदारी मेरी

देहरादून। कांग्रेस हाईकमान को उत्तराखंड समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव में मिली हार नागवार गुजरी है। विशेष रूप से उत्तराखंड में पार्टी को सत्ता हासिल करने का पूरा भरोसा था। यह भरोसा टूटते ही सबसे पहली गाज प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पर गिरी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश मिलते ही दिल्ली में मौजूद गोदियाल ने तुरंत अध्यक्ष पद से इस्तीफा सौंप दिया। प्रदेश अध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी पार्टी नई संभावनाओं को देखते हुए जल्द तय कर सकती है।

उत्तराखंड उन राज्यों में शामिल था, जहां कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में जीत मिलने की सर्वाधिक उम्मीद रही। इसे ध्यान में रखकर पार्टी हाईकमान की ओर से भी चुनाव में पूरी ताकत झोंकी गई। 10 मार्च को कांग्रेस की यह उम्मीद सिर्फ टूटी ही नहीं, बल्कि 19 सीटों पर ही सिमट जाने से पार्टी को बड़ा झटका लगा है। प्रदेश में कांग्रेस के चुनाव अभियान की बागडोर संभाल रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत कई दिग्गज चुनाव हार गए।

प्रदेश में मंथन से पहले उठा कदम

हार के कारणों को लेकर प्रदेश में दिग्गजों के बीच छिड़ी रार के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी दिल्ली में हार के कारणों पर मंथन किया। इसके बाद सभी पांच राज्यों के पार्टी अध्यक्षों से इस्तीफा मांग लिया गया। इसके लिए प्रदेश स्तर पर समीक्षा शुरू होने की प्रतीक्षा नहीं की गई। दिल्ली में मौजूद प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पार्टी का इशारा मिलने के बाद इस्तीफा देने में देर नहीं लगाई। इससे पहले भी गोदियाल हार को लेकर इस्तीफा देने की पेशकश कर चुके थे, लेकिन पार्टी नेताओं की सलाह पर उन्होंने यह कदम नहीं उठाया था।

परिणाम के दिन ही देना चाहता था इस्तीफा: गोदियाल

गोदियाल ने अपने इस्तीफे में यह उल्लेख किया कि कांग्रेस अध्यक्ष और प्रदेश नेतृत्व की तमाम कोशिशों के बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से त्यागपत्र दिया है। उन्होंने कहा कि वह परिणाम के दिन ही इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन हाईकमान के आदेश की प्रतीक्षा में रुके हुए थे। वह कांग्रेस कार्यकत्र्ता के रूप में संघर्ष करते रहेंगे।

परिणाम के बाद मात्र छह दिन में हटाए गए प्रदेश अध्यक्ष

कांग्रेस हाईकमान के सख्त रुख से प्रदेश में पार्टी नेताओं में भी खलबली है। दरअसल, 2017 में भी कांग्रेस की उत्तराखंड में बुरी तरह पराजय हुई थी। पार्टी सिर्फ 11 सीटों पर सिमट गई थी। तब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को हटाया तो गया, लेकिन इसमें केंद्रीय नेतृत्व ने करीब तीन माह का समय लिया। इस बार पार्टी हाईकमान ने मात्र छह दिन में ही यह निर्णय ले लिया। गोदियाल को चुनाव से करीब छह माह पहले बीते जुलाई माह में प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।

युवा और अनुभवी पर दांव खेल सकती है कांग्रेस

कांग्रेस के सामने उत्तराखंड में प्रदेश संगठन को मजबूत करने की चुनौती है। महज छह महीने प्रदेश संगठन की कप्तानी संभालने वाले गोदियाल के हटने के बाद अब पार्टी दोबारा नए चेहरे को आगे लाने की तैयारी कर रही है। प्रदेश संगठन के नए नेतृत्व की दौड़ में अपेक्षाकृत युवाओं पर भरोसा दिखाया जा सकता है। हालांकि कुछ अनुभवी और जिताऊ साबित हुए चेहरे को भी सामने लाने के संकेत भी मिल रहे हैं। प्रदेश में भी कांग्रेस के सांगठनिक चुनाव की कसरत की जानी है।

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