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चिपको आंदोलन:जंगलों में हरे पेड़ों पर चली आरी, रैंणी गांव के जंगल में वन तस्करों ने बीस से अधिक पेड़ काट डाले

चिपको आंदोलन की धरती चमोली रैंणी गांव के जंगल में वन तस्करों ने बीस से अधिक हरे पेड़ों पर आरी चला दी। घटना उस समय हुई, जब बीते 26 मार्च को रैंणी समेत तमाम जगहों पर चिपको आंदोलन की वर्षगांठ मनाई जा रही थी। रेंज अधिकारी ने बताया कि, तस्करों के खिलाफ सर्च वारंट जारी किए जा रहे हैं।

रैंणी से 3 किमी की दूरी पर चिपको वन के नाम से जाना जाने वाला पंगराणी का जंगल है। इस जंगल को कटान से बचाने के लिए 70 के दशक में गौरा देवी और साथी महिलाएं पेड़ों से चिपक गई थीं। 

ग्राम प्रधान ने कहा, गुफा में मिला तस्करों का सामान: रैंणी के ग्राम प्रधान भवान सिंह ने बताया कि, सोमवार सुबह जब कुछ गांव वाले पंगराणी के जंगल में गए तो उन्होंने देखा कि, तस्करों ने 20 से अधिक पेड़ों पर निकली गांठों को बेरहमी से काट दिया। ग्रामीणों को जंगल में ही एक गुफा में तस्करों का सामान भी मिला है। 

तने पर बनी गांठ बिकती है महंगे दामों में 
पंगराणी वन में मिश्रित प्रजाति का जंगल है। यहां कुछ प्रजातियों के पेड़ों में हर दो तीन वर्ष में प्राकृतिक रूप से गांठें उभरती हैं। यह गांठें लकड़ी के कटोरे और सजावटी सामग्री बनाने के काम आती हैं। 

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम, स्थानीय लोगों और वन प्रहरियों के साथ जंगल में पहुंच चुकी है। घटना के आवश्यक साक्ष्य जुटाये जा रहे हैं। दोषियों के खिलाफ सर्च वारंट जारी किया जा रहा है।
चेतना कांडपाल, रेंज अधिकारी 

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