अपराध
हल्द्वानी में शिक्षा माफिया पर बड़ा प्रहार, बुक सेलर्स पर छापे—महंगी किताबें थोपने वाले स्कूलों पर कार्रवाई तय
हल्द्वानी में शिक्षा माफिया पर बड़ा प्रहार, बुक सेलर्स पर छापे—महंगी किताबें थोपने वाले स्कूलों पर कार्रवाई तय
हल्द्वानी। जिला मजिस्ट्रेट नैनीताल के सख्त निर्देशों के बाद हल्द्वानी में शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्थाओं और कथित मनमानी के खिलाफ रविवार को प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया। शहर के विभिन्न बुक सेलर्स पर एक साथ छापेमारी कर स्कूलों और दुकानदारों के बीच चल रही कथित सेटिंग, महंगी किताबों की बिक्री और अभिभावकों पर डाले जा रहे अनावश्यक आर्थिक बोझ की परतें खोली गईं।
कार्रवाई के लिए नगर मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी और तहसीलदार हल्द्वानी के नेतृत्व में तीन टीमें गठित की गईं। इन टीमों में शिक्षा विभाग और राज्य कर विभाग के अधिकारी भी शामिल रहे, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ दबिश देकर कई प्रमुख बुक डिपो की जांच की।
नगर मजिस्ट्रेट की टीम ने कालाढूंगी रोड स्थित वर्धमान बुक डिपो, पूरनमल एंड संस और करियर जोन में जांच की। उपजिलाधिकारी की टीम ने मंगलपड़ाव क्षेत्र में पूरनमल एंड संस, दीक्षा बुक डिपो, टुडे बुक डिपो और पी कुमार बुक स्टोर का निरीक्षण किया, जबकि तहसीलदार की टीम ने कंसल बुक डिपो और प्रीत बुक डिपो की जांच की।
अभिभावकों की शिकायतों ने खोली पोल
निरीक्षण के दौरान अभिभावकों से सीधे संवाद में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कई अभिभावकों ने बताया कि कुछ स्कूल बच्चों को विशेष दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं और इसके लिए बाकायदा स्लिप दी जाती है। इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए प्रशासन ने संबंधित स्कूलों के खिलाफ नोटिस जारी करने के निर्देश शिक्षा विभाग को दिए हैं।
मान्यता पर भी उठे सवाल
जांच में यह भी सामने आया कि कई विद्यालय प्ले ग्रुप, प्री-नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी जैसी कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। प्रशासन ने इन स्कूलों की मान्यता और पंजीकरण की स्थिति पर सवाल उठाते हुए शिक्षा विभाग को तत्काल सत्यापन के निर्देश दिए हैं। बिना मान्यता के संचालन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
एनसीईआरटी के नाम पर खेल, महंगी किताबों का जाल
बुक सेलर्स से प्राप्त पुस्तकों की सूची और रेट लिस्ट के परीक्षण में बड़ा खुलासा हुआ। कई स्कूल ऐसे विषयों की किताबें चला रहे हैं, जो एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित ही नहीं हैं। इतना ही नहीं, इन अतिरिक्त पुस्तकों की कीमतें भी एनसीईआरटी की पुस्तकों के मुकाबले कहीं अधिक पाई गईं।
प्रशासन ने साफ किया है कि ऐसी किताबों को एनसीईआरटी के समकक्ष नहीं माना जा सकता और इनके औचित्य की जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
सैंपल जब्त, आईएसबीएन से होगी जांच
टीमों ने दुकानों से एनसीईआरटी की अधिकृत पुस्तकों के रेंडम सैंपल भी एकत्र किए हैं। इन पुस्तकों के आईएसबीएन नंबर सहित अन्य विवरणों की गहन जांच और सत्यापन के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी को भेजा जा रहा है, ताकि नकली या गलत पुस्तकों की पहचान की जा सके।
टैक्स गड़बड़ी भी रडार पर
छापेमारी के दौरान बुक सेलर्स के बिलों की भी जांच की गई। कई मामलों में बिलिंग को लेकर संदेह के आधार पर राज्य कर विभाग को विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। टैक्स चोरी या अनियमितता पाए जाने पर अलग से कार्रवाई की तैयारी है।
दुकानदारों को सख्त निर्देश
निरीक्षण के दौरान प्रशासन ने बुक सेलर्स को ग्राहकों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। पेयजल, बैठने की व्यवस्था और शेड अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने को कहा गया।
साथ ही शिक्षा विभाग के उस आदेश को भी सभी दुकानों पर चस्पा कराया गया, जिसमें 20 अप्रैल 2026 तक यूनिफॉर्म और किताबों की अनिवार्यता से छूट दी गई है, ताकि किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रभावित न हो।
अधिकारियों की मौजूदगी में चला अभियान
पूरे अभियान के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी गीतिका जोशी, सहायक आयुक्त अश्वनी सिंह, गौतम भंडारी, कुंदन पांगती, प्रधानाचार्य आशीष शर्मा और राजेंद्र सिंह सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
स्पष्ट संदेश—अब नहीं चलेगी मनमानी
प्रशासन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण और नियमों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में और भी सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
