अपराध
फर्जी दस्तावेजों का खेल: बागेश्वर में 10 शिक्षकों की नौकरी गई, नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
बागेश्वर। सरकारी स्कूलों में फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी हासिल करने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय सत्यापन में दस्तावेज फर्जी और कूटरचित पाए जाने के बाद बागेश्वर जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत 10 शिक्षकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों से जुड़ा है। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर की ओर से कराए गए दस्तावेज सत्यापन के दौरान इन शिक्षकों के प्रमाणपत्रों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। परिषद की जांच रिपोर्ट में प्रमाणपत्र फर्जी और कूटरचित पाए जाने के बाद विभाग ने संबंधित शिक्षकों के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई की।
विभागीय जांच में सामने आया कि संबंधित शिक्षकों ने नियुक्ति के दौरान जिन शैक्षणिक दस्तावेजों को प्रस्तुत किया था, उनकी वैधता संदिग्ध पाई गई। बोर्ड स्तर पर सत्यापन के बाद रिपोर्ट शिक्षा विभाग को भेजी गई, जिसके आधार पर सभी 10 शिक्षकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं।
इस कार्रवाई ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि नियुक्ति के समय इन शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन आखिर किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया था। यदि नियुक्ति से पहले दस्तावेजों की जांच पूरी तरह से की गई होती तो फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला इतने लंबे समय तक कैसे चलता रहा, यह जांच का अहम बिंदु हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में लंबे समय तक ऐसे शिक्षकों के पढ़ाने से बच्चों की शिक्षा पर पड़े असर को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि केवल सेवा समाप्ति से मामला खत्म नहीं होना चाहिए। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वालों से वेतन की वसूली के साथ-साथ नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उस समय दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
इन 10 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त
विभागीय कार्रवाई की सूची में कमला देवी—राप्रावि ससौला (कांडा), चंद्र प्रकाश आर्य—राप्रावि रीमा क्वेटी (कपकोट), रजनी—राप्रावि उछात (बागेश्वर), लक्ष्मी आर्य—राप्रावि स्यालडूंगा (कपकोट), रोहित कुमार—राप्रावि चनोस चूरसी (कपकोट), नेहा—राप्रावि नरगोली (कांडा), संजय कुमार—राप्रावि ठेली (कपकोट), अरविंद कुमार—राप्रावि जलमानी (कपकोट), पंकज कुमार—राप्रावि सुदींत (बागेश्वर) और प्रियंका—राप्रावि जडियारी जगथाना (कपकोट) शामिल हैं।
विभागीय सत्यापन में इन सभी के दस्तावेज रामनगर बोर्ड की जांच में फर्जी अथवा कूटरचित पाए गए। बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने सेवा समाप्ति की कार्रवाई की है। मामले में कठोर वैधानिक और कानूनी कार्रवाई के लिए तीनों ब्लॉकों के उपशिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं।
— अशाराम, प्रभारी डीईओ बेसिक, बागेश्वर

