उत्तराखण्ड
जैनी ने दिवाली से पहले राजधानी में फोड़ा तहलका बम : हरक सिंह रावत पर लगाए दुष्कर्म के गंभीर आरोप, बोलीं- मेरे बेटे को चाहिए पिता का नाम; दोबारा हो सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में चर्चित जेनी प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के खिलाफ गंभीर आरोप लगाने वाली महिला जेनी अब देहरादून पहुंची हैं। यहां आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अपने साथ कथित तौर पर हुई घटनाओं को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए। जेनी ने हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की दोबारा सीबीआई जांच कराने और डीएनए टेस्ट फिर से कराने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनके बेटे का डीएनए सैंपल ही नहीं लिया गया तो फिर डीएनए जांच किस आधार पर हुई? महिला ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें और उनके बेटे को न्याय चाहिए तथा उनके बेटे को अपने पिता का नाम मिलना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेनी ने बताया कि वह अक्टूबर 2002 में असम से देहरादून आई थीं। उस समय उनकी उम्र महज 16 वर्ष थी। वह यमुना कॉलोनी में करीब दो महीने तक रही थीं। महिला के मुताबिक, उस दौरान वह प्रिंस चौक स्थित एक एसटीडी बूथ पर काम करती थीं। वहां हरक सिंह रावत का एक कार्यकर्ता फोन करने आता था। जेनी ने बताया कि उन्होंने उस व्यक्ति से अपने लिए कोई काम दिलाने की बात कही थी। उन्हें बताया गया कि टिहरी गढ़वाल में एक संस्था के रिसेप्शन पर नौकरी मिल सकती है, लेकिन आरोप है कि उन्हें नौकरी दिलाने के बजाय यमुना कॉलोनी स्थित हरक सिंह रावत के आवास पर ले जाया गया।
जेनी ने आरोप लगाया कि हरक सिंह रावत उस समय सत्ता में थे और अपने राजनीतिक प्रभाव के चलते उन्होंने उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की। महिला का दावा है कि हरक सिंह रावत की सरकारी गाड़ी से उन्हें कई बार बाहर ले जाया गया। इनमें मसूरी और एक होटल में ले जाने की घटनाएं भी शामिल थीं। जेनी ने आरोप लगाया कि इसी दौरान उनके साथ दुष्कर्म किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में उन्होंने हरक सिंह रावत से अपने बच्चे को पिता का नाम देने की बात कही थी, लेकिन वहां उनके साथ बदतमीजी की गई।
**पागलखाने में रखने और धमकाकर बाहर निकालने का आरोप**
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेनी ने अपने साथ हुए कथित घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय वह गर्भवती थीं, लेकिन उनकी मदद करने वाला कोई नहीं था। उनका आरोप है कि उन्हें पागलखाने में डाल दिया गया था। वहां उनके साथ क्या-क्या हुआ, इसे बताते हुए वह कई बार भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उन्हें धमकाकर वहां से बाहर निकाल दिया गया और जिन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, उन्होंने कर दिए।
जेनी के मुताबिक, सीबीआई की टीम उनसे मिलने पागलखाने में केवल एक बार आई थी। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें हिंदी भी नहीं आती थी और वह अपनी बात ठीक से किसी के सामने रख पाने की स्थिति में नहीं थीं। महिला ने सवाल उठाया कि इतने गंभीर मामले में आखिर उनकी बात को ठीक से क्यों नहीं सुना गया?
**डीएनए जांच पर उठाए सवाल, बेटे को चाहिए पिता का नाम**
जेनी ने मामले की जांच और डीएनए टेस्ट को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब उनके बेटे का टेस्ट ही नहीं हुआ तो डीएनए जांच कैसे पूरी हो गई? उनका कहना था कि जांच के लिए कोई आया ही नहीं तो फिर डीएनए टेस्ट किस आधार पर किया गया? उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की नए सिरे से सीबीआई जांच हो और डीएनए टेस्ट दोबारा कराया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
महिला ने कहा कि उनका बेटा अब अपने पिता का नाम चाहता है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि इतने वर्षों तक उन्होंने जो कुछ सहा है, उसके बाद अब उन्हें और उनके बेटे को न्याय मिलना चाहिए। जेनी ने यह भी बताया कि वह एक बार अपने बेटे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए देहरादून आई थीं, लेकिन उन्हें दोबारा यहां कदम नहीं रखने के लिए कहा गया था।
उन्होंने बताया कि वह इस मामले में डीजीपी को अपनी शिकायत दे चुकी हैं। उनके अनुसार, उनका वकील उनसे केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाता है। महिला ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से उनका नाम लिया तो उन्होंने देहरादून आने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार भी जताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को लेकर सवाल पूछे जाने पर जेनी ने कहा कि वह महेंद्र भट्ट को नहीं जानतीं।
**कुछ दिन पहले वीडियो जारी कर कही थी अपनी बात**
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले जेनी का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें उन्होंने अपने नाम को लेकर हो रही राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक टिप्पणियों पर नाराजगी जताई थी। वीडियो में उन्होंने अपना परिचय असम की रहने वाली जेनी के रूप में देते हुए कहा था कि लोग उनके नाम पर राजनीति कर रहे हैं, लेकिन इतने वर्षों में किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था।
वीडियो में उन्होंने कहा था कि उनके बारे में एक-दूसरे पर आरोप लगाने और डीएनए जांच की मांग करने वाले लोग आखिर होते कौन हैं? उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह खुद अपनी जुबान से पूरी बात बताएंगी और प्रमाणों के साथ सामने आएंगी। उन्होंने वर्ष 2003 के आसपास अपने साथ हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा था कि वह समय आने पर सब कुछ बताएंगी।
अब देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जेनी ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की नए सिरे से जांच की मांग दोहराई है। उनके आरोपों ने एक बार फिर उत्तराखंड की सियासत में इस प्रकरण को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए ये आरोप महिला के दावे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। मामले में आरोपित पक्ष का जवाब भी महत्वपूर्ण होगा। अब देखना होगा कि पुलिस और जांच एजेंसियां महिला की ताजा मांगों पर क्या कदम उठाती हैं और इतने वर्षों से विवादों में रहे इस प्रकरण की जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है।
