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Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध के 50 दिन पूरे, जानें भारत पर हुआ क्या-क्या असर

रूस-यूक्रेन युद्ध को आज 50 दिन हो गए हैं। इन 50 दिनों में यूक्रेन ने बदहाली के सभी मंजर देखे हैं। विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार युद्धग्रस्त यूक्रेन की अर्थव्यवस्था चौपट होने के करीब है। यूक्रेन की अर्थव्यवस्था इस साल 45 फीसदी तक सिकुड़ सकती है। वहीं कीव स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (केएसई) की रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेन के आधारभूत ढांचे को करीब 80.4 अरब डॉलर की क्षति हुई है। बीते एक सप्ताह में आधारभूत ढांचे को अकेले 12.2 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। युद्ध से यूक्रेन को 600 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान का अनुमान है।

रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ वर्ष 2000 से 2011 के बीच वित्तमंत्री रहे एलेक्सी कुदरिन का अनुमान है कि युद्ध के दंश से रूस की अर्थव्यवस्था भी 2022 में दस फीसदी से अधिक गिर सकती है। 1991 में सोवियत संघ के गिरने के बाद ये सबसे बड़ी गिरावट होगी। रूसी उद्योगपतियों पर लगे प्रतिबंधों के कारण स्थिति और बिगड़ेने की संभावना है।

युद्ध की विभिषिका: 865 शिक्षण संस्था जमींदोज
यूक्रेनी वित्त मंत्रालय के अनुसार कुछ हद तक खंडहर में तब्दील हो चुके यूक्रेन में रूसी सेना ने 23 हजार किलोमीटर की सड़क ध्वस्त कर दी है। 865 शिक्षण संस्थान, 145 फैक्ट्रियां, 54 प्रशासनिक भवन, 277 ब्रिज, 10 मिलिट्री एयरफिल्ड, आठ एयरपोर्ट और दो बंदरगाह तबाह हो चुके हैं। इसके अलावा 74 धार्मिक स्थल और 62 सांस्कृति भवन जमींदोज हो चुके हैं।

42 दिन में 48 लाख बच्चे बेघर
यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के 42 दिनों में यूक्रेन के दो तिहाई बच्चे अपना घर छोड़ चुके हैं। वहीं अबतक 142 बच्चों की मौत हो चुकी है। यूनिसेफ के इमरजेंसी प्रोग्राम के निदेशक मैनुअल फॉनटेन का कहना है कि यूक्रेन में बच्चों की आबादी करीब 75 लाख है। इसमें से 48 लाख बच्चों का घर और स्कूल पूरी तरह से छूट चुका है।

28 लाख बच्चों पर खतरा बरकरार
रिपोर्ट के अनुसार 28 लाख बच्चे अभी भी यूक्रेन में जहां तहां फंसे हैं जबिक 20 लाख बच्चों ने पड़ोसी मुल्कों में शरण ले रखी है। वहीं 32 लाख बच्चे रूसी बमबारी के बीच अभी भी अपने घरों में कैद हैं। युद्ध क्षेत्र में घरों में कैद बच्चों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल भोजना की व्यवस्था न हो पाना है। सबसे खराब स्थिति कीव, मारियुपोल और दोनेत्सक में है।

महिलाओं के साथ यौन हिंसा
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद जान बचाकर भागने वाली पांच में से एक महिला या लड़की को यौन हिंसा का सामना करना पड़ा है। महिलाओं और लड़कियों के साथ बीच रास्ते में या शरणार्थी कैंपों में हैवानियत हुई। बुचा और मारियुपोल में महिलाओं से ज्यादती के मामले सामने आए हैं। युद्ध के कारण दूसरों पर निर्भर रहने वाले लोगों में से 54 फीसदी महिलाएं हैं।

युद्ध का भारत पर असर
1- 
युद्ध से क्रूड ऑयल की कीमतों ने 14 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नतीजा भारत में पेट्रोल-डीजल से लेकर सभी तरह के ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ।
2- रूस-यूक्रेन युद्ध से देश में खुदरा महंगाई दर 6.95 फीसदी के साथ 17 महीने के शीर्ष पर पहुंच गई है। मार्च में खाद्य वस्तुओं की कीमतें 7.68 फीसदी बढ़ी है।
3- यूक्रेन में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे 18 हजार छात्रों का भविष्य भी दांव पर लग गया है। खासतौर से इसमें डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले छात्र शामिल हैं।
4- देश के फॉर्मा उद्योगों ने रूस को 591 और यूक्रेन को 181 लाख अमेरिकी डॉलर की दवाएं मुहैया कराई हैं। अब ये पैसा युद्ध के कारण फंसा हुआ है।

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