उत्तराखण्ड
गुटबाजी की गुगली रोकने को कांग्रेस ने लगाया दोहरा शतक, संतुलन साधने के लिए बनी जंबो कार्यकारिणी
गुटबाजी की गुगली रोकने को कांग्रेस ने लगाया दोहरा शतक, संतुलन साधने के लिए बनी जंबो कार्यकारिणी
देहरादून। लंबे इंतजार के बाद घोषित हुई उत्तराखंड कांग्रेस की नई प्रदेश कार्यकारिणी अब केवल संगठनात्मक नियुक्तियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी तलाशे जा रहे हैं। करीब 208 नेताओं और पदाधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां देकर कांग्रेस ने प्रदेश संगठन में ऐसा “दोहरा शतक” लगाया है, जिसकी चर्चा पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह हो रही है।
नई कार्यकारिणी में 24 उपाध्यक्ष, 36 महासचिव, 107 सचिव समेत विभिन्न समितियों और कार्यकारिणी सदस्यों को मिलाकर बड़ी संख्या में नेताओं को स्थान दिया गया है। राजनीतिक जानकार इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले संगठन में सभी वर्गों और गुटों के बीच संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल लगातार यह कहते रहे थे कि कार्यकारिणी का आकार सीमित रखा जाएगा, ताकि संगठन अधिक चुस्त और प्रभावी तरीके से काम कर सके। लेकिन अंतिम सूची सामने आने के बाद तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई दी। सीमित कार्यकारिणी की जगह कांग्रेस ने प्रदेश स्तर पर सबसे बड़ी टीमों में से एक का गठन कर दिया।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस जंबो कार्यकारिणी के पीछे सबसे बड़ी वजह संगठन के भीतर सभी नेताओं को प्रतिनिधित्व देना रही। यदि बड़ी संख्या में नेताओं को जिम्मेदारी नहीं मिलती तो नाराजगी और गुटबाजी के स्वर उभर सकते थे। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व ने लगभग हर क्षेत्र, हर वर्ग और विभिन्न नेताओं के समर्थकों को समायोजित करने का प्रयास किया है।
कांग्रेस की राजनीति लंबे समय से अलग-अलग शक्ति केंद्रों और वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में किसी एक गुट की उपेक्षा भविष्य में संगठन के लिए चुनौती बन सकती थी। माना जा रहा है कि इसी संभावना को देखते हुए पार्टी ने “समायोजन की राजनीति” को प्राथमिकता दी और कार्यकारिणी का दायरा काफी बड़ा रखा।
हालांकि इतनी बड़ी कार्यकारिणी को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या इतने बड़े संगठनात्मक ढांचे के साथ प्रभावी समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित हो पाएगी। लेकिन फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व का संदेश साफ माना जा रहा है—चुनावी तैयारियों से पहले संगठन में किसी भी तरह की नाराजगी, गुटबाजी की गुगली या असंतोष को पनपने का मौका नहीं दिया जाए।
यही वजह है कि कांग्रेस की यह कार्यकारिणी अब केवल एक संगठनात्मक सूची नहीं, बल्कि प्रदेश की अंदरूनी राजनीति में संतुलन साधने और सभी को साथ लेकर चलने की रणनीति के रूप में भी देखी जा रही है।
