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क्यों बचा रही इस मंत्री को BJP?

विधानसभा में बैकडोर भर्ती मामले में काफी बवाल हुआ था। CM धामी ने स्पीकर को पत्र लिखकर जांच कराने का अनुरोध किया। विधानसभा अध्यक्ष ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी और जांच कमेटी का गठन कर इसकी जांच कराई। जांच में पिछले दरवाजे से नियम विरुद्ध सभी भर्तियां रद्द कर दी गईं। स्पीकर और CM धामी की पीठ खूब थपथपाई गई। लेकिन, बैकडोर भर्ती कराने वाले पूर्व अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और वर्तमान कैबिनेट मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सवाल यह है कि जब नियुक्त कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई तो किस आधार पर नियुक्त कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया। नियुक्ति देने वाले विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री के खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। इतना ही नहीं इतने बड़े भर्ती घोटाले में FIR भी दर्ज नहीं की गई।

सरकार की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं। अन्य मामलों में जहां कार्रवाई की जा रही है। लगातार गिरफ्तारियां की जा रही हैं। वहीं, विधानसभा भर्ती घोटाले में BJP सरकार ने पिछले दरवाजे से भर्ती घोटाले में शामिल प्रेम चंद अग्रवाल को अब तक नहीं हटाया है। वहीं, इस बात की भी काफी चर्चा थी कि उन्हें जल्द ही इस पद से हटा दिया जाएगा। सवाल यह है कि एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और दूसरी तरफ पिछले दरवाजे से भर्तियां करने वाले मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी इस मामले में पूरी तरह से सरकार के साथ है। फिर सरकार को दिक्कत क्या है?

लोग यहां तक ​​सवाल उठा रहे हैं कि अपनों की गर्दन फंसते ही BJP के कार्रवाई के दावे हवा साबित हो रहे हैं। जानकारों के मुताबिक अगर विधानसभा में पिछले दरवाजे से भर्ती मामले में BJP अपने मंत्री की गर्दन नहीं फंसी होती तो अब तक कानूनी कार्रवाई अमल में जा चुकी होती। लेकिन, मंत्री की संलिप्तता के कारण BJP कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

उत्तराखंड विकास पार्टी का कहना है कि यह पहला मामला है, जिसमें बड़े पैमाने पर भर्ती घोटाला हुआ। जांच में नियुक्तियों को भी गलत पाया गया। नियमों के खिलाफ नियुक्त कर्मचारियों को भी बर्खास्त कर दिया गया। लेकिन, नियमों के खिलाफ भर्ती करने वाले पूर्व अध्यक्षों के खिलाफ FIR तक दर्ज नहीं की गई। पार्टी का कहना है कि भर्ती घोटाले का आरोपी सरकार में कैबिनेट मंत्री है, उन्हें हटाने की बात चल रही थी, लेकिन BJP ने उनको अभयदान दिया है। इससे साबित होता है कि BJP अपनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती है।

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