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इस बार भद्रा पुंछ में होगा होलिका दहन, 18 मार्च को खेली जाएगी रंगों की होली; यह है मान्‍यता

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देहरादून: होलिका दहन के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। गुरुवार को भद्रा पुंछ में होलिका दहन किया जाएगा। रात 9:06 से 10:16 बजे तक भद्रा पुंछ रहेगा। इस एक घंटे 10 मिनट के अंतराल तक होलिका दहन का शुभ मूहूर्त रहेगा। वहीं शुक्रवार को भाईचारा, समानता और हर्षोल्लास के साथ रंगों की होली मनाई जाएगी।

होलिका दहन होगा गुरुवार को

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन हालिका दहन किया जाता है। आचार्य डा. सुशांत राज के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि गुरुवार को दोपहर एक बजकर 29 मिनट से शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। ऐसे में होलिका दहन गुरुवार का होगा।

पुंछकाल में होलिका दहन शुभ

वहीं गुरुवार को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से भद्रा प्रांरभ होगी जो रात एक बजकर 13 मिनट तक रहेगी। पुंछकाल में भद्रा का प्रभाव कम रहता है, जिसकी वजह से भद्रा की छाया कमजोर हो जाती है और इसका दोष भी खत्म हो जाता है। इसलिए पुंछकाल में होलिका दहन शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि होलिका दहन शरद ऋतु की समाप्ति व वसंत के आगमन पर किया जाता है।

यह मान्‍यता

मान्यता है कि हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे पह्लाद को मारने के लिए बहन होलिका को आदेश दिया था कि वह उसको गोद में लेकर आग में बैठे। आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, लेकिन ईश्वर की भक्ति में लीन प्रह्लाद बच गए। ईश्वर भक्त प्रह़्लाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है।

इस तरह करें होली पूजन

आचार्य बिजेंद्र प्रसाद ममगाईं के अनुसार, होलिका दहन से पहले होली का पूजन किया जाता है। पूजन सामग्री में एक लोटा गंगाजल यदि उपलब्ध न हो तो ताजा जल भी लिया जा सकता है।

  • रोली, माला, रंगीन अक्षत, धूप या अगरबत्ती, पुष्प, गुड़, कच्चे सूत का धागा, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, नारियल एवं नई फसल के अनाज गेहूं की बालियां, पके चने आदि शामिल करें। पूजा सामग्री के साथ होलिका के पास गोबर से बनी ढाल भी रखी जाती है।
  • होलिका दहन के शुभ मुहूर्त पर जो मौली, फूल, गुलाल, ढाल और खिलौनों से बनी चार मालाएं अलग से रख लें। इसमें एक माला पितरों के नाम की, दूसरी हनुमान जी के लिए, तीसरी शीतला माता और चौथी परिवार के नाम की रखी जाती है।पूरी श्रद्धा से होलिका के चारों और परिक्रमा करते हुए कच्चे सूत को लपेटें। तीन से सात बार होलिका की परिक्रमा करें। शुद्ध जल सहित अन्य पूजा सामग्रियों को एक-एक कर होलिका को अर्पित करें।
  • होली का पूजन कर जल से अर्घ्‍य दें और दहन के बाद होलिका में कच्चे आम, नारियल, सतनाज, चीनी के खिलौने, नई फसल इत्यादि की आहुति दें। सतनाज में गेहूं, उड़द, मूंग, चना, चावल जौ और मसूर शामिल की जा सकती है।

दुकानों में उमड़ी भीड़, चौराहों पर होलिका की तैयारी

होली की तैयारी को लेकर राजधानी के बाजारों में खरीदारों की भीड़ रही। सोमवार सुबह से ही हनुमान चौक, पलटन बाजार, करनपुर बाजार, चकराता रोड, धर्मपुर, पटेलनगर, प्रेमनगर आदि क्षेत्रों की दुकानों में कपड़े, खाद्य सामग्री, मिष्ठान, रंग, पानी के गुब्बारे, पिचकारी आदि की खरीदारी हुई।

इसके अलावा गुझिया, पापड़ चिप्स, नमकीन, रेडीमेड दहीबड़ा पाउडर, पनीर, दही की भी खूब खरीदारी हुई। इसके अलावा होलिका दहन के लिए दून के अधिकांश चौराहों और मैदानों में तैयारियां पूरी हो गई हैं। सामाजिक संगठनों के साथ ही लोग घरों से लकड़ी लेकर एकत्र करते और होलिका के चारों ओर रंगोली बना रहे हैं।

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