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विधिविधान के साथ खुले बदरीनाथ मंदिर के कपाट, पीएम मोदी के नाम से हुई पहली पूजा

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बदरीनाथ धाम के कपाट आज सुबह श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले दिए गए। इसके लिए 15 क्विंटल फूलों से मंदिर की भव्य सजावट की गई है। कपाट खुलने पर अखंड ज्योति के दर्शनों को देश-विदेश से सात हजार से अधिक यात्री धाम पहुंच चुके थे।

यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं को मिलेगा स्वच्छ पेयजल

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसे देखते हुए उनके लिए सुविधाएं जुटाने पर सरकार का विशेष जोर है। इस कड़ी में चारधाम यात्रा मार्गों पर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता के लिए वाटर प्यूरीफायर व वाटर एटीएम स्थापना के लिए शासन के निर्देश पर जल संस्थान ने प्रयास तेज कर दिए हैं। सचिव पेयजल नितेश झा के अनुसार अभी तक सौ वाटर प्यूरीफायर में से 44 लगाए जा चुके हैं, जबकि 21 अगले आठ-10 दिन के भीतर लग जाएंगे। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर लगभग 400 वाटर एटीएम भी स्थापित करने का लक्ष्य भी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पहली पूजा

 बदरीनाथ मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पहली पूजा की गई। कपाट खुलने के समय धाम में 10 हजार से ज्‍यादा श्रद्धालु मौजूद रहे।

मीलों पैदल यात्रा कर आए साधु-संतों ने भी किए दर्शन

कपाटोद्घाटन के दौरान कच्छ से मीलों पैदल यात्रा कर आए साधु-संतों ने भी दर्शन किए। इस दौरान श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय, ज्योतिमठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार सहित कई विशिष्ट व्यक्तियों ने भी दर्शन किए।

स्त्री वेश धारण कर गर्भ गृह में गए रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी

रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी द्वारा स्त्री वेश धारण कर गर्भ गृह से सर्वप्रथम मां लक्ष्मी को परिक्रमा स्थल में लक्ष्मी मंदिर में विराजमान किया गया। इसके बाद उद्धव जी व कुबेर जी, गरुड़ जी को गर्भ गृह में स्थापित किया गया। शंकराचार्य जी की गद्दी को मंदिर परिक्रमा स्थल पर विराजमान किया गया।

बदरीनाथ धाम नारायण के जयकारों से रहा गुंजायमान

कपाट खुलने के साक्षी बनने के लिए तड़के से ही सिंहद्वार से श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लग गई थी। ठंड के बाद भी श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखा गया। बदरीनाथ धाम नारायण के जयकारों से गुंजायमान रहा। मंदिर में कपाट खोलने की प्रक्रिया के दौरान धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल सहित वेदपाठियों ने मंत्रोचारण किया।

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