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स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन के जरिए राज्यों ने बटोरी 1.70 लाख करोड़ रुपये की आय, महाराष्ट्र रहा सबसे आगे

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नई दिल्ली. वित्त वर्ष 2021-22 में 27 राज्यों व एक केंद्र शासित प्रदेश (जम्मू-कश्मीर) ने स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क के जरिए 1.70 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं. यह इससे पिछले वित्त वर्ष जुटाई गई रकम 1.28 लाख करोड़ से 34 फीसदी अधिक है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 में औसत मासिक राजस्व संग्रह 14,262.5 करोड़ रुपये रहा जबकि वित्त वर्ष 2021 में यह 10,646.2 करोड़ रुपये था.

इस दौरान महाराष्ट्र ने सबसे अधिक 35,593.7 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क एकत्र किया. राज्य ने देश के कुल स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क राजस्व में 21 प्रतिशत का योगदान दिया.

अन्य राज्यों की स्थिति
कुल संग्रह में 12 प्रतिशत के योगदान के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा. इसने 20,048.3 करोड़ रुपये का राजस्व बटोरा. राज्य ने वित्त वर्ष 2021 में प्राप्त 16,475.2 करोड़ रुपये के राजस्व के मुकाबले 22 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है. तमिलनाडु 14,331 करोड़ रुपये के राजस्व के साथ तीसरे स्थान पर रहा. कर्नाटक और तेलंगाना स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क तालिका में क्रमश: 14,019.7 करोड़ और 12,372.7 करोड़ रुपये के राजस्व के साथ चौथे और पांचवें स्थान पर रहे.

किन राज्यों में सर्वाधिक वृद्धि दिखी
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क के जरिए राजस्व में सर्वाधिक वृद्धि तेलंगाना में देखी गई. वहां, 2020-21 के मुकाबले 136 फीसदी अधिक राजस्व बटोरा गया. इसके बाज 88 फीसदी के साथ जम्मू-कश्मीर, 78 फीसदी के साथ सिक्किम, 51 फीसदी के साथ नागालैंड, 47 फीसदी के साथ हरियाणा और 41 फीसदी के साथ गुजरात का स्थान रहा. तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, नागालैंड, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र ने सम्मिलित रूप से स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क से अपने राजस्व संग्रह में 40% से अधिक की वृद्धि दर्ज की है.

चालू वित्त वर्ष में नहीं जारी रहेगी वृद्धि
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य अर्थशास्त्री निखिल गुप्ता ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि वित्त वर्ष 22 में रियल एस्टेट सेक्टर में उल्लेखनीय रिकवरी हुई है. उन्होंने आगे कहा कि लेकिन अब ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो गई है और मुद्रास्फीति अधिक होने के साथ-साथ आर्थिक अनिश्चिचितता भी बढ़ी है, ऐसे में जारी वित्त वर्ष में फिर से ऐसी ही राजस्व वृद्धि की उम्मीद नहीं की जा सकती है.

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