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व्यंग्य: बलिदानी नेताजी और उनके अपने

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मनोज लोहनी
तो क्या नेता किसी शादी में भी नहीं जा सकते! जा सकते हैं, ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवानाÓ जैसा जो क्या हुआ यहां…। नेताजी शादी में आए तो बातें होने लगीं। शादी हुई, बारात भी विदा हुई। विदाई तो नेताजी की भी हुई थी। चुनाव से ठीक पहले। कुर्सी के साथ फेरे लिए थे पांच साल पहले, फिर विदाई कर दी। इतनी देर में क्यो? क्योंकि इस बात का कहीं अता-पता नहीं। मगर विदाई हुई। ऐसी विदाई भी कोई करता है क्या? मगर हुई। खैर कोई बात नहीं। विदाई में बुरा तो लगता है, अपने बिछड़ते भी हैं, नए लोग मिलते हैं। खैर बात शादी की हो रही थी, तो नेताजी शादी में आए। जाहिर है, नेताजी आएंगे तो अपने तो साथ होंगे ही। नेताजी की यही खूबी है, उनके साथ जो पहले थे, आज भी हैं। नेताजी का काफिला चलता है तो लगता है कि बारात ही है। बारात होती है, कभी-कभी यह बारात एक अलग सरकार जैसी भी दिखने लगती है। नेताजी इधर की तरफ आए तो ऐसा ही दिखा भी। मीडिया में एक अलग गुण-मुण…। बारात रामनगर में थी। रामनगर में कार्बेट और कार्बेट में ‘गजराजÓ होते हैं, तो यहां गजराज तो थे ही, नेताजी के आने के बाद का एक अलग तरह का ‘प्रकाशÓ भी। नेताजी जी की खूबी है कि अपनों को मना भी लेते हैं। अभी टिकट बंटे, गुस्से की चिंघाड़। ऐसी कि दिल्ली तक बात पहुंच गई। गजराज भला कहां काबू होते, किसी से नहीं हुए तो फिर नेताजी ने ही उन्हें थपथपाया तो वह शांत। यही नेताजी की खूबी है, अपने हैं तो हैं, नहीं हैं तो नहीं। तो बात फिर शादी की। नेताजी शादी में आए और उन्होंने आशीर्वाद दिया। अपनों को आशीर्वाद देना ही होता है, दिया। पहले भी दिया था, आगे भी देंगे…तो इसमें भला नया क्या। आशीर्वाद देना ही होगा…ऐसा उनकी राशि बताती है। तुला राशि के स्वामी नेताजी के बारे में ज्योतिष कहती है कि इस नाम के लोगों में बहुत सब्र होता है और जो बात इन्हें खास बनाती है वह यह कि इस राशि के व्यक्ति परिवार के लिए बलिदान देने के लिए तैयार रहते हैं। ऐसा हमने अभी देखा भी…चुनाव से ठीक पहले। बाकी आप खुद समझदार।

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