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टीएमयू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अजय पंत का देहावसान, कुलाधिपति बोले, टीएमयू की अपूर्णनीय क्षति

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मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्राचार्य प्रो. अजय पंत का देहावसान हो गया। वह 68 साल के थे। प्रो. पंत ने अपोलो हॉस्पिटल में मंगलवार की तड़के अंतिम सांस ली। निमोनिया से पीड़ित थे। प्रो. पंत ने टीएमयू में 14 बरस अपनी सेवाएं दीं। प्रो. पंत गमगीन माहौल में अपने पीछे धर्मपत्नी डॉ. ज्योत्सना पंत और पुत्री स्वाति पंत को छोड़ गए हैं।

दूसरी ओर ऑडी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने प्रो. पंत के निधन को अपूर्णनीय क्षति बताते हुए टीएमयू में उनकी सेवाओं को याद किया। इनके अलावा जीवीसी श्री मनीष जैन और एग्जिक्यूटिव डॉयरेक्टर श्री अक्षत जैन ने भी प्रो. पंत के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। शोक सभा में टीएमयू के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह, निदेशक प्रशासन श्री अभिषेक कपूर, रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा, डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल प्रो. एसके जैन ने प्रो. पंत को नेक दिल इंसान बताते हुए उनके असमय निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। प्रो. पंत को मेडिकल की फैकल्टीज़ और छात्र-छात्राओं ने भी उनके आवास पर अपनी भावभींनीं श्रद्धांजलि दी। टीएमयू से लेकर केजीएमसी, लखनऊ तक प्रो. पंत के साथियों ने उनकी तमाम मधुर स्मृतियों को याद किया।

डीन स्टुडेंट्स वेलफेयर प्रो. एमपी सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया, प्रो. पंत की अंतिम यात्रा बुद्धवार (आज) को सुबह नौ बजे टीएमयू कैंपस से ब्रजघाट के लिए प्रस्थान करेगी।टीएमयू में आयोजित शोक सभा में श्री अजय गर्ग, श्री विपिन जैन, प्रो. वीके सिंह, प्रो. प्रीथपाल सिंह मटरेजा, प्रो. एनके सिंह, प्रो. अमित सराफ, डॉ. जिगर हरिया आदि ने भी अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। उत्तराखंड से संबद्ध प्रो. पंत का जन्म मुरादाबाद में हुआ था। प्रो.पंत के पिता डॉ. हरि शंकर पंत मुरादाबाद के प्रतिष्ठित डॉक्टरों में शुमार थे, जबकि दादा श्री भोलादत्त पंत भी वैद्य थे।

उल्लेखनीय है, प्रो. पंत ने 1976 में केजीएमसी, लखनऊ से एमबीबीएस और वहीं से 1980 में ऑर्थों में एमएस की पढ़ाई की। टीएमयू से पूर्व प्रो. पंत केजीएमसी, लखनऊ, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर और एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज, बरेली में भी बतौर मेडिकल फैकल्टी अपनी सेवाएं दे चुके थे। श्री पंत का अंत तक उत्तराखंड की संस्कृति से अगाध जुड़ाव रहा। वह बाबा नीम करौली महाराज के अनन्य भक्त थे। मृदुभाषी, प्रतिभाशाली, प्रखर वक्ता, हंसमुख और जिंदादिल इंसान प्रो. पंत उत्तराखंड सांस्कृतिक विकास समिति, मुरादाबाद के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। प्रो. पंत के अजीज उन्हें अज्जू कहकर बुलाते थे।

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