अंतर्राष्ट्रीय
पाकिस्तानी सेना का कमांडो रहा लश्कर आतंकी ढेर, यूसमर्ग में सुरक्षा बलों से मुठभेड़
पाकिस्तानी सेना का कमांडो रहा लश्कर आतंकी ढेर, यूसमर्ग में सुरक्षा बलों से मुठभेड़
जम्मू। दक्षिण कश्मीर के यूसमर्ग में मंगलवार देर रात सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर सुलेमान शाह उर्फ फौजी मूसा मारा गया। कोरा इलाके में खुफिया सूचना के आधार पर सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। सुरक्षा बलों की मौजूदगी का पता चलते ही आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में सुलेमान शाह ढेर हो गया।
सुरक्षा एजेंसियों को इलाके में तीन से चार आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। इसके बाद पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई और तलाशी अभियान को रातभर जारी रखने की तैयारी की गई। घने जंगल और पहाड़ी भूभाग को देखते हुए सुरक्षा बल बेहद सतर्कता के साथ अभियान चला रहे हैं।
पाकिस्तानी सेना से लश्कर तक का सफर
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, सुलेमान शाह उर्फ फौजी मूसा वर्ष 2022 में घुसपैठ के रास्ते कश्मीर घाटी में दाखिल हुआ था। इसके बाद उसने अपना नेटवर्क सक्रिय करने और युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती कराने में भूमिका निभाई। बताया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने से पहले वह पाकिस्तानी सेना की एसएसजी कमांडो यूनिट से जुड़ा था।
उसका संबंध पीर पंजाल के दोनों ओर आतंकी गतिविधियों से भी बताया जा रहा था। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, वह घाटी में आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिशों में सक्रिय था।
यूसमर्ग मुठभेड़ से मिला सुराग
सुरक्षा बलों ने इससे पहले 4-5 सितंबर को यूसमर्ग में हुई मुठभेड़ में लश्कर के पाकिस्तानी आतंकी यासिर को मार गिराया था। मुठभेड़ के बाद उसके एक साथी के जंगलों में छिपे होने की आशंका जताई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उस साथी की पहचान बाद में असिफ फौजी उर्फ मूसा के रूप में सामने आई और उसकी तलाश में यूसमर्ग के ऊंचाई वाले जंगलों में अभियान चलाया गया।
पीर पंजाल के जंगलों में बढ़ा दबाव
सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले दो महीनों से पीर पंजाल के घने जंगलों में सक्रिय विदेशी आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज किया है। 4-5 सितंबर की मुठभेड़ में मारे गए यासिर को वर्ष 2021 से 2024 के बीच पुंछ में सुरक्षा बलों पर हुए हमलों से जोड़कर देखा गया था। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, यासिर और उसके साथियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी।
लगातार चलाए गए अभियानों के बाद आतंकियों पर दबाव बढ़ा है और वे पीर पंजाल के घने जंगलों की ओर जाने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा बल अब जंगलों में छिपे अन्य आतंकियों की तलाश के लिए अभियान को और तेज करने में जुटे हैं।

