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उत्तराखंड में ‘हाथ’ क्यों नहीं आ रहे कांग्रेस के टिकट!
पता नहीं क्यों कांग्रेस के टिकट हाथ क्यों नहीं आ रहे। अब तो नामांकन भी शुरू हो चुके हैं, मगर टिकट बांटने को लेकर हाईकमान के हाथ नहीं खुल पा रहे हैं। मुट्ठी आखिर कब तक बंद रहेगी? यही सवाल हर कोई कर रहा है। मुट्ठी खुल के टिकट हाथ आएं…मगर बहुत देर हो रही है। तमाम सीटों पर आखिर पार्टी किस उलझन में है? अब तक हरक सिंह रावत का मुद्दा भी सुलट गया है, मगर टिकट फिर भी हाथ नहीं आ रहे हैं। कांग्रेसियों में इस बात को लेकर बेचैनी है। बेचैनी दावेदारों में भी बहुत है। टिकट हाथ आने के बाद आखिर चुनाव लडऩे के लिए तैयारी भी तो करनी होती है। अंदर की बात यह चल रही है कि कांग्रेस चाहती है कि भाजपा अपने सभी सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दे, मगर भाजपा ने अभी ११ सीटों पर पत्ते नहीं खोले हैं। शायद इस वजह से भई कांग्रेस असमंजस में है। मगर कार्यकर्ता बेचैन हैं। उनका कहना है, जिन सीटों पर कोई कनफ्यूजन नहीं है, कम से कम वहां तो टिकट बंट जाते। इससे कार्यकर्ताओं में भी गलत मैसेज जा रहा है, और कोई कनफ्यूजन नहीं होने के बाद भी कनफ्यूजन की स्थिति बनने लगी है। बड़े नेताओं का चुनाव लडऩा तय नहीं हो पा रहा है तो, इस गफलत में पार्टी के अन्य दावेदारों की क्यों भद पिटा रहे हैं। इस बात को समझने के लिए हाईकमान तैयार नहीं है। आज यानी शनिवार को टिकटों का ऐलान हो सकता है, मगर अभी तक इस बारे में कहीं कोई हलचल नहीं है। टिकट कब हाथ आएंगे, इसी इंतजार में कार्यकर्ता और दावेदार बैठे हैं। दरअसल कांग्रेस भीतर इतने गुट बने हैं कि पार्टी को शायद बैलेंस बनाने में दिककत आ रही है। प्रीतम गुट, हरीश गुट के बाद हरीश की जिनसे नहीं बनी उनके अलग गुट, मसलन रणजीत सिंह रावत गुट। फिर इस बार तमाम ओपीनियन पोल में भाजपा के साथ लड़ाई कांटे की दिखी है तो एक-एक सीट की वैल्यू है। शायद इसीलिए टिकट बंटने में इतनी देरी हो रही है, मगर गुटों की वजह से। अब क्या जागेश्वर सीट से गोविंद सिंह कुंजवाल या श्रीनगर सीट से गणेश गोदिया के चुनाव लडऩे पर कोई संशय है क्या? ऐसी ही तमाम सीटें हैं जहां प्रत्याशी तय है, तो कार्यकर्ता चाह रहे थे कि कम से कम वहीं टिकट बंट जाते। देखना है इंतजार और कितना आगे बढ़ता है???