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आंखों में नमी, दिल में यादें…  प्राचार्य आभा शर्मा को सेवानिवृत होने पर महिला महाविद्यालय में दी गई शानदार विदाई 

 

आंखों में नमी, दिल में यादें…  प्राचार्य आभा शर्मा को सेवानिवृत होने पर महिला महाविद्यालय में दी गई शानदार विदाई

हल्द्वानी। राजकीय स्नातकोत्तर महिला वाणिज्य महाविद्यालय हल्द्वानी का माहौल सोमवार को उस समय भावुक हो उठा, जब महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. आभा शर्मा को सेवानिवृत्ति पर भावभीनी विदाई दी गई। वर्षों तक महाविद्यालय की जिम्मेदारियों को संभालने वाली डॉ. शर्मा के विदाई समारोह में उनके परिजन, महाविद्यालय परिवार, पूर्व प्राध्यापक, छात्राएं और अन्य अतिथि मौजूद रहे। मंच से जब उनके कार्यकाल की उपलब्धियों और व्यक्तित्व का उल्लेख हुआ तो कई आंखें नम नजर आईं।

 

 

कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद वक्ताओं ने डॉ. आभा शर्मा के कार्यकाल को अनुशासन, संवेदनशीलता, ईमानदारी और मानवीय मूल्यों से जुड़ा स्वर्णिम दौर बताया। वक्ताओं ने कहा कि प्राचार्य के रूप में उन्होंने केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां ही नहीं निभाईं, बल्कि छात्राओं और महाविद्यालय के कर्मचारियों के साथ आत्मीय संबंध भी बनाए। यही कारण रहा कि उनके सेवानिवृत्त होने का अवसर महज एक औपचारिक विदाई कार्यक्रम न रहकर भावनाओं से जुड़ा आयोजन बन गया।

 

आंखों में नमी, दिल में यादें…  प्राचार्य आभा शर्मा को सेवानिवृत होने पर महिला महाविद्यालय में दी गई शानदार विदाई 

महाविद्यालय की वरिष्ठ प्राध्यापक प्रोफेसर देवकी गिरी गोस्वामी ने कहा कि डॉ. आभा शर्मा ने अपने कार्य और व्यवहार से जो मार्गदर्शन दिया, उसका अनुसरण करना सभी के लिए प्रेरणादायी रहेगा। उन्होंने उनके द्वारा दिए गए संस्कारों और जीवन मूल्यों को याद करते हुए कहा कि उनके बताए मार्ग पर चलना जीवन में सुख और शांति का आधार बन सकता है।

 

 

वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. माया शुक्ला ने कहा कि डॉ. आभा शर्मा ने महाविद्यालय में अनुशासन और सद्व्यवहार की मजबूत परंपरा स्थापित की। उनके उदार और सहज स्वभाव के कारण कठिन से कठिन कार्य भी आपसी सहयोग और सौहार्द के साथ पूरे होते रहे। उन्होंने कहा कि प्राचार्य के रूप में डॉ. शर्मा की कार्यशैली लंबे समय तक महाविद्यालय परिवार को याद रहेगी।

 

आंखों में नमी, दिल में यादें…  प्राचार्य आभा शर्मा को सेवानिवृत होने पर महिला महाविद्यालय में दी गई शानदार विदाई 

सम्मान पत्र प्रदान करते हुए डॉ. नरेंद्र कुमार जोशी ने कहा कि डॉ. आभा शर्मा ने अपने कार्यकाल को पूरी निष्ठा, अनुशासन और नियमबद्ध तरीके से पूरा किया। उनका कार्यकाल जिम्मेदारी और समर्पण का उदाहरण रहा है।

डॉ. आभा शर्मा के बड़े भ्राता एवं पूर्व निदेशक प्रोफेसर बीसी मेलकानी ने कहा कि उनकी बहन ने जीवन में अथक परिश्रम किया और पूरी गरिमा के साथ अपने सेवाकाल को पूरा किया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण है।

समारोह में डॉ. शर्मा के पति डॉ. शर्मा और उनकी बेटी महक ने उनके जीवन से जुड़े कई रोचक और भावुक संस्मरण साझा किए। इन संस्मरणों ने समारोह के माहौल को और आत्मीय बना दिया। महाविद्यालय से स्थानांतरित हो चुकीं डॉ. गीता पंत, डॉ. सरस्वती बिष्ट, डॉ. प्रदीप पांडे और डॉ. रेखा जोशी ने भी डॉ. शर्मा के साथ बिताए कार्यकाल को याद करते हुए उनकी कार्यशैली और व्यवहार की सराहना की तथा उन्हें उपहार भेंट किए।

प्रोफेसर देवकी गिरी गोस्वामी ने डॉ. आभा शर्मा को तुलसी का पौधा और भगवद्गीता भेंट की, जबकि डॉ. सरस्वती बिष्ट ने भी पौधे उपहार स्वरूप प्रदान किए। शोध छात्राओं ने स्मृति चिह्न और पुष्पगुच्छ भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। स्टाफ क्लब की ओर से भी उन्हें आकर्षक उपहार प्रदान किए गए।

वरिष्ठ प्राध्यापक रश्मि पंत, डॉ. नेहा सिंह, डॉ. दिनेश चंद्र, डॉ. स्वाति मेलकानी, डॉ. रुचि रजवार, डॉ. मंजरी चौधरी, डॉ. सुरभि गुप्ता और डॉ. विवेक कुमार सहित अन्य प्राध्यापकों ने डॉ. शर्मा के कार्यकाल को महाविद्यालय का स्वर्णिम युग बताते हुए उनके ममत्व और वात्सल्य भरे व्यवहार को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ डॉ. शर्मा ने महाविद्यालय परिवार के सदस्यों के प्रति जिस आत्मीयता का परिचय दिया, वह उन्हें सबसे अलग बनाता है।

समारोह के दौरान डॉ. रुचि रजवार और डॉ. मंजरी जोशी ने डॉ. आभा शर्मा के जीवन और कार्यकाल की यादों पर आधारित वीडियो प्रस्तुति भी दिखाई। स्क्रीन पर पुराने कार्यक्रमों और साथ बिताए पलों की तस्वीरें सामने आते ही सभागार भावुक हो उठा। यह प्रस्तुति उनके सेवाकाल की यादों को एक बार फिर जीवंत कर गई।

विदाई समारोह में अपने संबोधन के दौरान प्रोफेसर डॉ. आभा शर्मा भी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि जीवन में अनुशासन और समय के महत्व को समझना बेहद जरूरी है। व्यक्ति यदि अपनी प्रगति चाहता है तो उसे जीवन में अनुशासन के महत्व को स्वीकार करना होगा। उन्होंने महाविद्यालय परिवार की ओर से मिले सम्मान, स्नेह और अपनत्व के लिए सभी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में बिताया समय उनके जीवन की महत्वपूर्ण स्मृतियों में हमेशा शामिल रहेगा। यहां मिले सहयोग, सम्मान और आत्मीयता को वह अपने साथ लेकर जा रही हैं।

पूरे कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. हेमचंद्र दुबे ने किया। अंत में वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. माया शुक्ला ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर डॉ. नीता शाह, डॉ. दीपा पांडे, डॉ. नीलम, डॉ. मंजरी जोशी, डॉ. गणेश नेगी, डॉ. विजय कुमार बिष्ट, डॉ. संजू कुमार, डॉ. फकीर सिंह, डॉ. ज्योति चुफाल, मंजू मेहरा, गणेश सिंह, क्वार्बी, कविता कोरंगा, पुष्पा मेहरा, भीम सिंह, चंदन सिंह, यशोधर नाथ, प्रकाश चंद्र, ललिता, पूजा शाहिद सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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