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उत्तराखंड वूलेन यार्न इकाई के चार निदेशकों को कैद, 1984 के दौरान मशीनें बेचने के मामले में हुआ था मुकदमा

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देहरादून: मशीनें बेचने के चार दोषियों को तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्टे्रट निहारिका मित्तल गुप्ता की अदालत ने तीन-तीन महीने की कैद व 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि अदा न करने पर प्रत्येक दोषी को तीन-तीन महीने अतिरिक्त कैद में रहना पड़ेगा।

वर्ष 1984 के दौरान उत्तराखंड वूलेन यार्न इकाई की ओर से उत्तर प्रदेश फाइनेंशियल कारपोरेशन (यूपीएफसी) के पक्ष में कुछ मशीन बंधक रखी हुई थीं। उत्तराखंड वूलेन यार्न इकाई के अधिकारियों ने मिलकर बंधक मशीन को अवैध रूप से बेचने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर दिए। आरोप था कि उन्होंने मिलकर यूपीएफसी में बंधक रखी गई मशीनों को बेच दिया। मामला हाई प्रोफाइल होने के चलते 1984 में जांच सीबीसीआइडी को सौंपी गई। 1993 के दौरान इस मामले में आरोपित सुरेंद्र आर्य, वेदप्रकाश गर्ग, सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता, विवेक गुप्ता, कुलवंत राय गोयल, पवन कुमार, तिलक राज और अतुल मिश्रा के खिलाफ देहरादून के सहसपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।

अदालत में ट्रायल के दौरान वेद प्रकाश गुप्ता व सुरेंद्र गुप्ता का निधन हो गया था। वहीं, तिलक राज चावला व अतुल मिश्रा के खिलाफ मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। दूसरी ओर अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष मशीनें बेचने संबंधी अनुमति पत्र की पत्रावली कोर्ट में दाखिल नहीं कर सका। ऐसे में उत्तराखंड वूलेन यार्न की मशीनों को फर्जी कागजात के आधार पर बेचा जाना साबित नहीं होता है। मात्र कहने से अभियोजन दायित्व समाप्त नहीं होता। अभियोजन को चाहिए था कि वह तथाकथित फर्जी अनुमति पत्र को न्यायालय के समक्ष पेश करते।

करीब 29 साल मामला कोर्ट में चलने के बाद अदालत ने उत्तराखंड वूलेन यार्न इकाई के निदेशक सुरेंद्र आर्य, कुलवंत राय, पवन कुमार व विवेक गुप्ता को दोषी मानते हुए 10-10 हजार रुपये जुर्माना व तीन-तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।

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