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ऊर्जा परियोजना का पहला सबसे बड़ा समझौता, टीएचडीसी राजस्थान में करेगी दस हजार मेगावाट की परियोजनाएं स्थापित

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ऋषिकेश : टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (टीएचडीसीआइएल), राजस्थान अक्षय उर्जा निगम लिमिटेड (आरआरईसीएल) के साथ संयुक्त उपक्रम के रूप में राजस्थान में दस हजार मेगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा पार्क परियोजनाएं स्थापित करेगा।

करीब 40 हजार करोड़ रुपये के इस अनुमानित निवेश के लिए टीएचडीसीआइएल ने आरआरईसीएल के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। बताया गया कि देश में दस हजार मेगावाट की नवीकरण ऊर्जा परियोजना का यह पहला सबसे बड़ा समझौता है।

टीएसडीसीआइएल के लिए एतिहासिक क्षण

शुक्रवार को टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के ऋषिकेश स्थित कारपोरेट कार्यालय में टीएचडीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंधक निदेशक राजीव विश्नोई, राजस्थान सरकार के अपर मुख्य सचिव व आरआरईसीएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डा. सुबोध अग्रवाल की उपस्थिति में टीएचडीसी की ओर से महाप्रबंधक अक्षय ऊर्जा संजय खेर व आरआरईसीएल की ओर से निदेशक तकनीकी सुनित माथुर ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए टीएचडीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजीव विश्नाई ने बताया कि टीएसडीसीआइएल के लिए यह एक एतिहासिक क्षण है। राजस्थान सरकार, राजस्थान रिन्युएबल एनर्जी कार्पोरेशन (आरआरइसीएल) के माध्यम से इस परियोजना के लिए भू बैंक से भूमि आवंटन करेगी। नवीकरणीय ऊर्जा पार्कों का कार्यान्वयन एसपीवी के माध्यम से आरआरईसीएल के साथ संयुक्त उपक्रम के रूप में 74:26 के अनुपात में किया जाएगा।

इन परियोजनाओं का निर्माण कार्य प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 10 हजार रोजगार के अवसर सृजित करेगा, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि टीएचडीसीआइएल एवं आरआरईसीएल का संयुक्त उपक्रम शीघ्र ही पवन ऊर्जा तथा ऊर्जा के अन्य नवीनतन स्रोतों के क्रियान्वन पर भी आगे बढ़ेगा। कहा कि यह कदम काप-26 में भारत सरकार के 2030 तक 500 गीगावाट के अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा अभिवृद्धि के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी योगदान करेगा।

राजस्थान सरकार के अपर मुख्य सचिव व आरआरईसीएल के सीएमडी डा. सुबोध अग्रवाल ने टीएसडीसीआइएल के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में हुई इस नई पारी की शुरुआत पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि राजस्थान आज अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में देश में पहले स्थान पर है।

कहा कि टीएचडीसी के सहयोग से इन परियोजनाओं को अगले तीन से पांच वर्ष के भीतर धरातल पर उतारा जाएगा। इस अवसर पर टीएचडीसी के निदेशक (वित्त) जे बेहरा ने कहा कि टीएचडीसीआइएल देश के विभिन्न भागों में अपने व्यवसायिक प्रचालन का विस्तार कर रही है। टीएचडीसी की कंपनी सचिव रश्मि शर्मा ने परियोजना की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

टीएचडीसी को मिलेगा 10 हजार मेगावाट की संस्थापित क्षमता का उछाल

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड वर्तमान में 1587 मेगावाट की संस्थापित क्षमता के साथ देश में एक प्रमुख विद्युत उत्पादक बन गई है।

जिसमें उत्तराखंड में टिहरी बांध एवं एचपीपी (1000 मेगावाट), कोटेश्वर एचईपी (400 मेगावाट), गुजरात के पाटन में 50 मेगावाट एवं द्वारिका में 63 मेगावाट की पवन विद्युत परियोजना, उत्तर प्रदेश के झांसी में 24 मेगावाट की ढुकुवां लघु जल विद्युत परियोजना एवं केरल के कारसगाड में 50 मेगावाट की सौर विद्युत परियोजना शामिल है।

राजस्थान में आरआरईसीएल के साथ हुए दस हजार मेगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा पार्क परियोजनाओं की स्थापना संबंधी समझौते से टीएचडीसी की संस्थापित क्षमता में एक बड़ा उछाल मिलेगा। वर्तमान में टीएचडीसीआइएल नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उत्तरप्रदेश में यूपीनेडा के साथ मिलकर 2000 मेगावाट के अल्ट्रा मेगा सौर पार्कों पर भी काम कर रही है।

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