उत्तराखण्ड
प्रेस क्लब नहीं, बदरी विशाल के दरबार में जवाब दें’ : गोदियाल पर द्विवेदी का तीखा पलटवार
‘प्रेस क्लब नहीं, बदरी विशाल के दरबार में हो बहस’ : गोदियाल पर द्विवेदी का तीखा पलटवार
देहरादून। बदरीनाथ मंदिर के चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल द्वारा बीकेटीसी पर लगाए गए आरोपों के बाद मंगलवार को श्री बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने जोरदार पलटवार करते हुए कहा कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। ऐसे मामलों पर प्रेस क्लब या सड़क पर बहस नहीं, बल्कि बदरी विशाल और बाबा केदार के दरबार में जवाब दिया जाना चाहिए।
द्विवेदी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष यह आरोप लगा रहे हैं कि आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को चढ़ावा गणना ड्यूटी में उन्होंने लगाया था, जबकि वास्तविकता यह है कि नौटियाल अप्रैल 2025 से ही इस ड्यूटी में तैनात था। उस समय वह बीकेटीसी अध्यक्ष नहीं थे, इसलिए यह आरोप तथ्यों से परे है।
उन्होंने कहा कि बदरी-केदार मंदिर समिति अधिनियम के अनुसार मंदिर कोष का उपयोग अन्य विकास कार्यों में नहीं किया जा सकता। बिनसर मंदिर और पोखरी का शिव मंदिर भी बीकेटीसी के अधीन नहीं आते। इसके बावजूद गणेश गोदियाल के कार्यकाल में कुछ मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए राशि स्वीकृत की गई थी।
द्विवेदी ने गोदियाल के बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित कराने के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि तत्कालीन अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने केवल तीन लोगों की मौजूदगी में प्रस्ताव पारित कराया था, जिसके दस्तावेजी प्रमाण समिति के पास हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 1983 से अस्तित्व में रहे वैयक्तिक सहायक के पद पर प्रमोद नौटियाल को नियमों को दरकिनार कर पदोन्नति दी गई।
बीकेटीसी अध्यक्ष ने कहा कि चढ़ावा हेराफेरी मामले में जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। ऐसे समय में आस्था से जुड़े विषय को राजनीतिक मंच बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए।
गौरतलब है कि बदरीनाथ मंदिर के चढ़ावा हेराफेरी मामले में आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी के बाद यह प्रकरण राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। कांग्रेस सरकार और बीकेटीसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा और बीकेटीसी विपक्ष के आरोपों को भ्रामक बताते हुए लगातार जवाब दे रहे हैं।
यह संस्करण अखबार में प्रकाशित होने वाली प्रोफेशनल रिपोर्टिंग शैली में तैयार किया गया है, जिसमें दोनों पक्षों के दावों को समाचार की भाषा में रखा गया है।
