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डीएम ने रेलवे से पूछा- कब हटाएंगे अतिक्रमण, फोर्स का करना होगा इंतजाम, पुनर्वास का प्रावधान नहीं

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उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ होने जा रही अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई इन दिनों सुर्खियों में है। डीएम धीराज गब्र्याल ने रेलवे अथॉरिटी से कहा है कि अतिक्रमण हटाने की सूचना 10 से 15 दिन पहले उपलब्ध कराएं, जिससे पैरामिलटरी और पीएसी आदि फोर्सेज के रहने के लिए बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम किया जा सके। क्योंकि कार्रवाई में लंबा समय लग सकता है।

डीएम ने कहा कि अतिक्रमण हटाना रेलवे का काम है और शांति व्यवस्था बनाए रखना हमारा काम। ऐसे में रेलवे को कम से कम 10-15 दिन पहले कार्रवाई की जानकारी देनी होगी। जिससे फोर्सेज को बुलाने और जब तक कार्रवाई चले तब तक उनके रहने के साथ बिजली, शौचालय और भोजन-पानी का इंतजाम किया जा सके। हजारों निर्माण ध्वस्त होने हैं, इसलिए कार्रवाई में एक से डेढ़ माह भी लग सकते हैं। इसका खर्च रेलवे काे वहन करना होगा।

फोर्स की जानकारी अभी नहीं दे सकते

डीएम ने कहा कि कार्रवाई के लिए कितनी फोर्स बुलाई जा रही है, इसे फिलहाल साझा नहीं किया जा सकता है। यह गोपनीय रखा गया है। हजारों निर्माण ध्वस्त होने हैं इसलिए व्यापक इंतजाम किया जाएगा। रेलवे की तरफ से डेट मिलती है तो लोगों को अलर्ट किया जाएगा। संभवत: ऐसे लोग भी हों जो दूसरे राज्यों के हों और वह जाना चाहें।

मुनादी कराकर किया जाएगा अलर्ट

डीएम ने कहा कि अतिक्रमणकारियों की कोर्ट प्रक्रिया चली है। प्रथम स्तर पर रेलवे कोर्ट ने सुना है। उसके बाद डिस्ट्रिक कोर्ट ने सुना। माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद सभी कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में जिस दिन से अतिक्रमण हटाना है उससे काफी पहले से इन लोगों को मुनादी कराकर अलर्ट कर दिया जाएगा, जिससे उन्हें परेशानी न हो।

पुनर्वास हमारे स्तर का मामला नहीं

अतिक्रमण हटाने पर बेघर होने वाले लोगों के लिए प्रशासन क्या करेगा, क्या उनका पुनर्वास किया जाएगा, इस पर डीएम ने कहा कि यह मामला हमारे स्तर का नहीं है। क्योंकि अतिक्रमण की जद में हजारों लोग हैं। ऐसे में इस पर फिलहाल हम कुछ नहीं कह सकते हैं। फिलहान पुनर्वास जैसी कोई बात नहीं है।

चार हजार से अधिक घर कार्रवाई की जद में

हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर 4356 भवन कार्रवाई की जद में हैं। बताया जाता है कि 40 साल पहले रेलवे की भूमि खाली थी। अतिक्रमण के मकडज़ाल ने जमीन को घेर लिया। कई सरकारी स्कूल, अस्पताल और धर्म स्थल बने। इसके लिए जितना दोषी लोग हैं उतनी ही पूर्व की सरकारें भी। वोट बैंक के लिए लोगों का इस्तेमाल किया गया। रेलवे की जमीन पर बैठे लोगों के स्थाई प्रमाणपत्र के साथ ही आधार कार्ड व राशन कार्ड बना दिए गए।

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